विकास कार्यों के लिए वार्षिक बजट का होगा प्रावधान
अधिनियम के तहत होने वाले विकास कार्यों के लिए वार्षिक बजट का प्रावधान होगा। उत्तराखंड समेत अन्य हिमालयी राज्यों को केंद्र सरकार से 90 प्रतिशत वित्तीय सहयोग मिलेगा, जिससे राज्य पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और ग्रामीण विकास में तेजी आएगी। पर्वतीय व आपदा संवेदनशील राज्य के रूप में उत्तराखंड में जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन व ग्रामीण अवसंरचना में भी यह अधिनियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एसबीआई की विश्लेषण रिपोर्ट अनुसार अधिनियम से राज्यों को करीब 17,000 करोड़ का शुद्ध लाभ होगा। सीएम ने कहा यह योजना गरीबी के मूल कारणों पर प्रहार है।
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किसानों को मजदूरों की कमी नहीं होगी
अधिनियम में ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले कार्यों में तकनीक आधारित पारदर्शिता रखी गई है। इसमें बायोमेट्रिक हाजिरी, जियो टैगिंग, जीएसआई मैपिंग, मोबाइल एप, सार्वजनिक डैशबोर्ड, एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन, साल में दो बार अनिवार्य सोशल ऑडिट का प्रावधान किया गया है। किसानों के हितों के सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है। फसलों की बुवाई व कटाई के मौसम में अधिकतम 60 दिन तक योजना के काम कानूनी रूप से रोके जा सकेंगे। जिससे किसानों को मजदूरों की कमी नहीं होगी।
आवश्यकताओं के आधार पर विकास कार्य तय होंगे
योजना में काम थोपे नहीं जाएंगे, ग्राम पंचायत लोगों की आवश्यकताओं के आधार पर विकास कार्य तय करेंगे। कम से कम 50 प्रतिशत काम सीधे ग्राम पंचायतों के स्तर पर कराए जा सकेंगे। जॉब कार्ड, पंजीकरण, योजना निर्माण कार्य ग्राम सभा के स्थानीय स्तर पर तय होंगे। इसके अलावा जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका परिसंपत्तियां, तालाब, चेकडैम, सड़क, नाली, स्कूल, अस्पताल, स्वयं सहायता समूहों के शेड, स्किल सेंटर, हाट, रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज कार्य होंगे। इस मौके पर राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायक दलीप रावत, महासचिव कुंदन परिहार मौजूद रहे।