-राज्यसभा में सांसद नरेश बंसल ने लिया वंदेमातरम पर चर्चा में हिस्सा
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने सदन में वंदेमातरम पर चल रही चर्चा में भाग लिया। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम भारत की आत्मा है। वंदेमातरम बंकिम बाबू की एक रचना मात्र नहीं आनंदमठ का प्रेरक अध्याय है।
सांसद बंसल ने कहा, वंदेमातरम केवल एक गीत नही वंदन है पावन माटी का, चंदन है पावन माटी का, संदर्भ है अपनी परिपाठी का, यह जननी का अमर गान है, स्वत्व की पहचान है। यह मंत्र है उस चेतना का जो क्रांतिवीरों के मन में हुंकार बनकर गूंजता था।
प्रत्येक देशवासी इसे पूजता था। आज मां का कौन वो लाल है, जो मातृ वंदना के विरोध में खड़ा है। जिसकी आंखों पर स्वार्थ का आवरण जला है। कौन है जो निज विरासत को पहचानता नहीं, परंपरा संस्कृति को जानता नहीं, हम भारतवासी ही नहीं, भारत मां के पुत्र हैं। आज 150वीं वर्षगांठ पर इस भारतीय संसद में वंदेमातरम गीत पर चर्चा चिंतन का शुभ अवसर है।
सांसद बंसल ने बताया कि जब वह कॉलेज छात्र और विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता थे, उन्होंने वंदेमातरम गायन की अनुमति मांगी जो नहीं दी गई थी। एक अन्य संस्था का वाणी परिषद का गठन करके हम कुछ कार्यकर्ताओं ने वंदेमातरम की जयंती मनाई। हमने वंदेमातरम कहकर आपके उस तानाशाही रवैये के खिलाफ जेलों को भरने का काम किया। आपको मजबूर किया कि आप आपातकाल हटाएं। उस समय नहीं झुके होते तो भारत मां का बंटवारा नहीं होता।