उत्तराखंड से चलने वाली पहली वंदे भारत ट्रेन को लेकर रेलवे स्टेशन परिसर में गजब का उत्साह था। ट्रेन को देहरादून रेलवे स्टेशन से मंगलगीत के साथ रवाना किया गया, जैसे ही ट्रेन चलने लगी वैसे ही स्टेशन पर प्रसिद्ध मांगल गीत दैणा होयां खोली का गणेशा हे.... गूंज उठा।
खास से लेकर आम तक हर किसी ने इस दिन को ऐतिहासिक और यादगार बताया। जबकि इससे पहले पारंपरिक परिधान में लोक नृत्य व गीतों की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। मांगल गीत दैणा होयां खोला का गणेशा हे... मंगल कार्यों, सांस्कृतिक संध्याओं समेत पहाड़ पर अक्सर गुनगुनाया जाता है। वास्तविक रूप से गढ़ रत्न लाेक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने इस गीत में देवताओं को प्रसन्न और प्रकट होने का आह्वान किया है। देणा होयां का अर्थ खुश, प्रसन्न और प्रकट होने के साथ अपनी कृपा बरसाना है।
खोली पर विराजमान होते हैं गणेश भगवान
उत्तराखंड में पहाड़ी शैली में बने घरों का जो मुख्य द्वार होता है, जहां से अक्सर ऊपरी मंजिल की सीढ़ियां भी शुरू होती हैं, उसी को ‘खोली’ कहा जाता है और इस खोली पर विराजमान होते हैं गणेश भगवान, जिनका जिक्र इस गीत में किया गया है। इन्हें ही खोली का गणेश कहा जाता है।
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मोरी के नारैण का संबंध भी इन्हीं पहाड़ी शैली के घरों से है। इनके मुख्य द्वार को खोली कहते हैं और खिड़कियों को मोरी। इन मोरियों पर सुंदर नक्काशी वाले विष्णु भगवान यानी नारायण विराजमान होते हैं। उन्हें ही याद करते हुए इस गीत में मोरी का नारैण कहा गया है।