लोग भले ही कान्हा जी के बर्थडे (जन्माष्टमी) पर सुबह-शाम उनका विशेष पूजन करते हों, 56 भोग लगाते हों, दून के धर्मपुर निवासी वंदना डोरा पिछले सात साल से हर दिन सुबह पांच बजे से शाम साढ़े आठ बजे तक ठाकुर जी की सेवा करती हैं। सुबह नाश्ते से लेकर लंच, डिनर और रात को उन्हें दूध देकर सुलाने के बाद ही खुद सोती हैं।
कान्हा को मानती हैं बेटा
ठाकुर जी को वंदना बेटा मानती हैं। वर्ष 2008 में 18 जुलाई को जब वंदना के घर नन्हे कान्हा आए थे, तब से अब तक हर 18 जुलाई को केक काटकर ठाकुर जी का बर्थडे मनाती हैं। बताया कि जन्माष्टमी के मौके पर वह आसपास और रिश्तेदारों के 12 ठाकुर जी को विशेष तौर पर आमंत्रित करती हैं।
सभी को अपने ठाकुर जी के साथ बिठाती हैं और खिलाती, पिलाती हैं। सभी का पूजन करती हैं। नन्हें कान्हाओं को गिफ्ट भी देती हैं। बताया कि परिवार वालों के सहयोग से ही वह कान्हा जी का बर्थडे धूमधाम से मना पाती हैं। पति सुनीत डोरा और बेटा शुभम भी इन सब कामों में पूरा सहयोग करते हैं।
कान्हा को बेटे की तरह मानती हैं रमिंद्री
जोगीवाला निवासी (पूर्व जिला संरक्षण अधिकारी) रमिंद्री मंद्रवाल को कान्हा जी को अपने घर लाए 37 साल हो गए। छह साल की उम्र से ही रमिंद्री खुद को कान्हा की मां के रूप में देखती हैं। रमिंद्री ने शादी नहीं की। बताया कि हर साल कान्हा का बर्थडे मनाती हैं। जन्माष्टमी पर उनके घर अलग ही धूम होती है।