चेकों के लेन-देने से जुड़े फर्जीवाड़े रोकने के लिए आरबीआई ने दो लाख से अधिक राशि के चेकों की यूवी लैंप जांच के निर्देश तो जारी कर दिए हैं, लेकिन सवाल यह है कि फ्रॉड रोशनी में कैसे आ पाएगा।
चेक को मल्टीलेवल जांच प्रक्रिया से गुजारने के निर्देश
क्योंकि 90 प्रतिशत बैंक शाखाओं में यूवी लैंप ही नहीं। मुख्य शाखाओं को छोड़ अन्य शाखाओं में चेकों की जांच कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है। आरबीआई ने दो लाख रुपए से अधिक राशि के चेक को अल्ट्रावॉयलेट लैंप से पास करने और पांच लाख से अधिक के चेक को मल्टीलेवल जांच प्रक्रिया से गुजारने के निर्देश दिए हैं।
इसमें खाताधारक को एसएमएस या फोन के जरिए सूचित करने जैसे कदम भी शामिल है। उसने नए खातों में बड़े लेन-देन पर भी निगरानी को कहा है। धोखाधड़ी की का हवाला देते हुए सीटीएस चेकों के अधिक इस्तेमाल की बात दोहराई है।
मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) मनोज शर्मा की तरफ से इस संबंध में बैंकों को पत्र भेजा गया है। इसमें सर्विस ब्रांच (जहां सभी शाखाओं से चेक एकत्र कर संबंधित बैंकों को भेजी जाती है) से भी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने को कहा है।
जिस खाताधारक के खाते में चेक जमा हो रहा है, उसके केवाईसी जांचने के लिए तेजी से धन जमा होने और निकासी पर भी नजर रखने को कहा है।
चेक ड्रॉप बॉक्स से चेक निकालने में भी सावधानी बरतने और खाताधारक का नाम, खाता संख्या, हस्ताक्षर का नमना, चेक का सीरियल नंबर आदि किसी को भी न देने का निर्देश दिया है।
बैंक में यूवी लैंप की व्यवस्था नहीं है। मुख्य शाखा को छोड़ दिया जाए तो बाकी जगह का हाल एक जैसा है।
- वाईएस वर्मा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
शाखाओं में यूवी लैंप नहीं है। आरबीआई के निर्देश लैंप में चेक जांच के संबंध में हैं, इनकी व्यवस्था जरूरी है।
- रमेश कुमार, शाखा प्रबंधक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
सप्ताह में एक ही बार लगा सकेंगे नॉन-सीटीएस चेक
तकरीबन सभी बैंकों की तरफ से सीटीएस चेक बुक जारी कर दिए जाने के बाद अभी भी बड़ी मात्रा में ऐसे नॉन सीटीएस चेक हैं, जो निर्धारित राशि के लिए जारी किए गए हैं।
ऐसे चेकों को अब सप्ताह में एक ही बार क्लियरेंस के लिए लगाया जा सकेगा। बीती 31 अक्तूबर तक ऐसे चेक दो बार लगाए जा सक रहे थे।