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केदारघाटी के सच पर किसने कैसे डाला पर्दा?

Sat, 19 Oct 2013 09:51 PM IST
ओमप्रकाश तिवारी/अमर उजाला, देहरादून
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केदार घाटी में जून माह में आई आपदा ने जो वेदना दी उससे आम आदमी से लेकर चित्रकार तक की संवेदनाओं को हिलाकर रख दिया। लोगों के दिलों दिमाग पर ऐसे जख्म मिले हैं जो कई पीढ़ी तक दर्द देते रहेंगे। रिश्तों पर ऐसा घात हुआ है जो हमेशा प्रतिघात करते रहेंगे और पीड़ा के मारे रिस्ते रहेंगे।
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साथ ही यह सवाल भी उपजा है कि आपदा के लिए जिम्मेदार कौन है? प्रकृति के कोप के पीछे कहीं मानव के कृत तो नहीं हैं? तबाही में छिपी बाबा केदार की नाराजगी क्या संकेत देती है? इन्हीं वेदनाओं और सवालों को अपने चित्रों में मुकेश पहाड़ी ने अभिव्यक्त किया है।

मूलत: रुद्रप्रयाग जिले के धार तोंदला निवासी मुकेश पहाड़ी दून के एक स्कूल में आर्ट के शिक्षक हैं। साथ ही बच्चों को संगीत की भी शिक्षा देते हैं। केदारघाटी में आई आपदा के बाद इन्होंने घाटी का दौरा किया। कई दिनों तक क्षेत्र में पीड़ितों से मिलते रहे। उनके दुख-दर्द को अपने अंदर जज्ब करते रहे।
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चित्रों में अभिव्यक्त किया
दून लौटने के बाद लोगों की वेदनाओं को चित्रों में अभिव्यक्त किया है। मुकेश कहते हैं कि वह अपने चित्रों के माध्यम से लोगों को जगाना चाहते हैं। यदि इन चित्रों को देखकर कोई एक भी सजग हो जाए तो उनका कार्य सार्थक हो जाएगा। उनकी ख्वाहिश है कि उनकी महत्वपूर्ण कलाकृति राजभवन में लगाई जाए, ताकि वहां पर उसे लोग देख सकें और उन्हें इससे कुछ प्रेरणा ले सकें।

रोजी-रोटी का भी संकट
अगस्तमुनि के सौड़ी गांव पर आपदा ने गहरा जख्म दिया है। इस गांव की अधिकतर महिलाएं विधवा हो गई हैं। उनके सामने जिंदगी जीने के अलावा बच्चों को पालने और रोजी-रोटी का भी संकट है। प्रकृति ने कुछ भी नहीं छोड़ा है। इन महिलाओं की सूनी आंखों में तूफान की तरह उमड़ते दर्द को मुकेश ने महसूस किया और उसे अपने चित्र में अभिव्यक्त किया है। मुकेश कहते हैं कि इन महिलाओं की स्थिति अब स्थायी नहीं है। इनके अस्तित्व पर संकट है। इसीलिए मुकेश ने अपने चित्र में महिलाओं के चेहरों को गायब कर दिया है।

कोई भी यहां रहना नहीं चाहता
मुकेश की अगस्तमुनि पर ही एक अन्य कलाकृति है पलायन पर। वह कहते हैं कि यहां के लोगों की जड़ें हिल गई हैं। अब कोई भी यहां रहना नहीं चाहता। सभी दूसरी जगह चले जा रहे हैं। लोगों के इसी दर्द को इस चित्र में उकेरा गया है। उन्होंने देवाल गांव की 32 महिलाओं के दर्द को भी अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। केदारघाटी की आपदा में इनके पति की मौत हो चुकी है। इस कलाकृति में मुकेश ने विधवा महिलाओं की स्थिति, उनके दर्द और भावनाओं को अभिव्यक्ति दी है।

केदारघाटी में हालात बहुत खराब
केदारघाटी में मारे गए लोगों की भावनाओं को भी मुकेश ने अपने चित्र में स्थान दिया है। वह कहते हैं कि हर किसी की इच्छा होती है कि मरने के बाद उसके शव का दाह संस्कार किया जाए। लेकिन केदारघाटी में मारे गए हजारों लोगों को यह नसीब नहीं हुआ। मुकेश कहते हैं कि केदारघाटी में हालात बहुत खराब हैं लेकिन वहां के सच पर शासन से लेकर प्रशासन तक पर्दा डाल दिया है। यही हाल राजनेताओं का भी है। कोई सच कहने सुनने को तैयार नहीं है। मुकेश की इस कलाकृति में बहुत सारे शवों को अपने दाह संस्कार का इंतजार करते दिखाया गया है। यह भी दिखता है कि सच पर कैसे पर्दा डाल दिया गया है।
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