देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तरकाशी के तिलोथ जल विद्युत गृह के लिए एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने यूनिट नंबर-2 के जर्जर स्फेरिकल मेन इनलेट वॉल्व (एमआईवी) को बदलने की मंजूरी दी है। इसके लिए 9.57 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश को सशर्त सैद्धांतिक मंजूरी मिली है।
उत्तरकाशी में 90 मेगावाट क्षमता का तिलोथ जल विद्युत गृह 1984 से बिजली उत्पादन कर रहा है। एमआईवी टरबाइन तक पानी ले जाने वाली पाइपलाइन और टरबाइन के बीच मुख्य सुरक्षा प्रहरी होता है। यह टरबाइन में खराबी या अनियंत्रित बहाव पर पानी रोककर पावर हाउस को बचाता है। नौ नवंबर 2020 को यूनिट-2 में अचानक लोड गिरा और मशीन से असामान्य आवाजें आने लगीं। प्रेशर रिलीफ वॉल्व का तेल दबाव शून्य हो गया और भीषण पानी का रिसाव शुरू हुआ। निरीक्षण में वॉल्व की डिस्क खिसकी हुई पाई गई और कई पुर्जे टूट चुके थे। इंजीनियरों की कोशिशें नाकाम रहीं, जिससे यूनिट-2 को भारी जोखिम के कारण बंद करना पड़ा। भागीरथी नदी के पानी में मौजूद क्वार्ट्ज सिल्ट ने 42 सालों में वॉल्व को घिस दिया था। वॉल्व बॉडी में गहरे क्रैक भी आ गए थे।
वर्ष 2016-17 से 2025-26 के बीच एमआईवी की बार-बार मरम्मत से कुल 42.65 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन नष्ट हुआ। अकेले यूनिट नंबर-2 ने 15.21 करोड़ यूनिट का नुकसान झेला, जो कुल का 36 फीसदी है। पुराने वॉल्व से काम चलाने पर अगले 10 सालों में 21.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय नुकसान होता। नया वॉल्व लगाने से यह लागत मात्र पांच वर्षों में वसूल हो जाएगी। नए वॉल्व में काउंटरवेट ग्रेविटी क्लोजिंग और मैकेनिकल लॉकिंग सिस्टम जैसी खूबियां होंगी।
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नदी में पानी कम होने पर एक माह ही बंद कर सकेंगे मशीन
आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा एवं सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने ये फैसला सुनाया। उन्होंने साफ किया कि यह निर्माण स्वीकृत राशि में ही करना होगा। मशीन का शटडाउन सिर्फ एक महीने का होगा। वह भी सर्दियों या लीन सीजन में जब नदी में पानी कम होता है। यूनिट-2 से निकाले गए पुराने वॉल्व को दुरुस्त कर यूनिट एक और तीन के लिए बैकअप में रखा जाएगा।