इसके साथ ही स्कूली बच्चों को भी जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में करीब 40 परिवार निवास करते हैं। शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। उसके बाद जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने स्वंय श्रमदान कर कमल नदी पर लकड़ी की पुलिया का निर्माण किया।