हालांकि उसके बाद वन विभाग और प्रशासन ने इसकी जानकारी स्थानीय लोगों से भी ली। तो उनका कहना था कि यह ग्लेशियर लंबे समय से उस स्थान पर देखा जाता है। इसलिए इसमें किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
बरसात में हर्षिल के बीच बहने वाले ककोडा गाड का जलस्तर कई बार बढ़ता ही रहता है। इस जानकारी के बाद प्रशासन और वन विभाग की टीम ने राहत की सांस ली। एसडीआरएफ के निरीक्षक जगदंबा प्रसाद ने बताया कि एहतियातन वहां टीम निरीक्षण के लिए भेजी गई है। उसकी रिपोर्ट प्रशासन को दी जाएगी।