- तीन सौ कार्मिक खोज, बचाव एवं राहत कार्य में जुटे।
- आराकोट में बेसकैंप, तीन आपदा राहत केंद्र संचालित।
- 300 आपदा पीड़ितों के भोजन की व्यवस्था ।
- पशुपालन विभाग की दो टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात।
- आराकोट में डेढ़ सौ कुंतल लकड़ी उपलब्ध।
- 6 जेसीबी, दो पोकलैंड तथा 1 कम्प्रैशर कार्यरत ।
- 52 गांवों में से चालीस में विद्युत आपूर्ति बहाल।
- 12 गांवों मे पेयजल आपूर्ति हुए सुचारु।
- स्वास्थ्य विभाग की 10 डाक्टरों की 4 टीमें तैनात।
- दस हेलीपेड से एयरफोर्स संचालित कर रही राहत कार्य।
- भवन क्षति का आकलन के लिए टीमें कर रही कार्य।
नहीं है केंद्र से पैकेज की जरूरत
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मानसून सीजन में 59 लोगों की मौत, 55 घायल, 12 लापता, 323 पशु हानि और 134 भवनों को आंशिक और 115 को पूर्ण क्षति पहुंची है। कुल 170 करोड़ रुपये का नुकसान है, जबकि आपदा का फंड 320 करोड़ रुपये मौजूद है। ऐसे में केंद्र से पैकेज की जरूरत नहीं है।
उत्तरकाशी के आराकोट समेत कई इलाकों में बादल फटने से हुई तबाही के बाद हादसे में घायल लोगाें का दून आने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को एक गर्भवती समेत तीन घायलों को एयर लिफ्ट करके लाया गया। जिनमें आराकोट निवासी निशा व सागर को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जबकि आराकोट की ही रहने वाली गर्भवती ललिता को गांधी शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां विशेषज्ञों की टीम उसका इलाज कर रही है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि अस्पताल में भर्ती नौ मरीजों में से आठ की हालत स्थिर है। एक मरीज के पैर में फ्रैक्चर है जिसकी सर्जरी की जाएगी। बाकी सभी मरीजों की स्थिति सामान्य हैं। वहीं देर शाम सचिव चिकित्सा ने अस्पताल का दौरा कर मरीजों के इलाज की जानकारी ली और हरसंभव इलाज का आश्वासन दिया।
दून अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ी, बेड के लिए मारामारी
दून अस्पताल में मरीजों की भीड़ काफी बढ़ गई है। आलम यह है कि अस्पताल में भर्ती दर्जनों मरीजों को अस्पताल के वार्डों के बजाय गैलरी में रखा गया है। उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनएस खत्री ने बताया कि अस्पताल में कुल 425 बेड हैं। इसके अलावा 26 बेड डेंगू के मरीजों के लिए आरक्षित किए गए हैं, लेकिन अस्पताल में इतने अधिक मरीज पहुंच गए हैं बेड कम पड़ गए हैं। डॉ. खत्री ने बताया कि गांधी अस्पताल व कोरोनेशन समेत कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के बजाय उन्हें दून अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है।
आपदा का वक्त और दून अस्पताल में आईसीयू बंद
प्रदेश में आपदा आई हुई है और दून अस्पताल का आईसीयू वार्ड तीन दिन से बंद है। ऐसे में आईसीयू की सुविधा न होने से अस्पताल प्रशासन के साथ ही मरीज भी परेशान हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा था कि मंगलवार से आईसीयू वार्ड में स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू कर दी जाएंगी। लेकिन आज भी स्थिति जस की तस बनी रही। ्र
आराकोट क्षेत्र के गांवों में बादल फटने से मची तबाही से क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इनमें अभी तक आराकोट, सनेल, माकुड़ी एवं नगवाड़ा टिकोची से ही जनहानि की सूचना मिली है, जबकि अन्य गांवों में सेब के बगीचे, खेत, संपर्क मार्ग, सड़क, पुल, पुलिया आदि परिसंपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
सड़क, पुल एवं रास्ते तबाह होने से इन गांवों में करीब दस हजार आबादी कैद होकर रह गई है। इन गांवों से सेब की तैयार फसल को मंडियों तक पहुंचाने की स्थिति नहीं बन पाने से ग्रामीणों की आजीविका पर खतरा मंडराने लगा है।
उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 200 किमी की दूरी पर मोरी-त्यूणी-रोहड़ू (हिमाचल) हाईवे पर स्थित आराकोट में बीते रविवार को भारी तबाही मची। यहां तक का सड़क संपर्क बहाल होने पर प्रशासन द्वारा यहां बेस बनाकर आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य किए जा रहे हैं। यहां दो सौ से अधिक ग्रामीण प्रशासन द्वारा बनाए गए शिविर में शरण लिए हुए हैं।
आराकोट से क्षेत्र के गांवों को जोड़ने वाली सड़क पर 5 किमी दूर मोल्डी और इससे आगे 4 किमी पर नगवाड़ा टिकोची बाजार है। यह क्षेत्र के डेढ़ दर्जन गांवों का प्रमुख बाजार है। टिकोची का पुल आपदा में तबाह होने से इससे आगे वाहनों की आवाजाही ठप पड़ी है। इससे पहले भी सड़क तीन स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त पड़ी है और मोल्डी गांव में भी काफी नुकसान हुआ है।
क्षेत्र के किशोर सिंह राणा ने बताया कि नगवाड़ा टिकोची में रेस्क्यू टीमें अभी भी खोज एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। यहां राजकीय एलोपैथिक अस्पताल, राइंका टिकोची, बेसिक स्कूल और दो निजी स्कूलों के साथ ही दर्जनों भवन बाढ़ और मलबे से तबाह हो गए हैं। जान बचाने में कामयाब रहे लोग अभी तक आपदा के भय से नहीं उबर पाए हैं और बदहवास हैं।