डोकरानी ग्लेशियर क्षेत्र में लगा है उपकरण
विशेषज्ञ आपदा और उससे चार दिन पहले का भी बारिश का आंकड़ा जुटाने में लगे हैं। यह आंकड़ा डोकरानी ग्लेशियर इलाके में लगे उपकरण के माध्यम से लेने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भागीरथी बेसिन जैसी नदी घाटियों वाले इलाके में बरसात और माैसम में बदलाव दिखाई देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार समान ऊंचाई (लगभग 3800 मीटर) पर भी बारिश की मात्रा में बड़ा अंतर देखा जाता है। सूत्रों के अनुसार वाडिया संस्थान के उपकरण मानसून अवधि में गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में लगभग तीन सौ मिमी वर्षा और डोकरानी ग्लेशियर क्षेत्र में यह आंकड़ा बारह सौ मिमी तक रिकार्ड कर चुके हैं। दोनों में चार गुना का अंतर दिखता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार संबंधित क्षेत्र में ग्लेशियरों से पिघला हुआ पानी नीचे की तरफ बहता रहता है। ऐसे में अधिक बारिश या कई दिनों की लगातार बारिश से उत्पन्न पानी और उसमें ग्लेशियर पिघलने के कारण बना पानी नीचे की तरफ मलबा (ग्लेशियर के पीछे हटने पर बड़े- बड़े बोल्डर (मोरन) छोड़ते जाते हैं, यह मलबा खीरगंगा कैचमेंट एरिया में फैला हुआ है) लेकर आ सकता है। हालांकि सही कारणों का अधिकृत तौर पर पता विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आने के बाद ही चल सकेगा। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने रिपोर्ट नहीं मिलने की बात कही है।