एकीकृत आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में 10 हजार महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं। इन समूहों के माध्यम से पहाड़ी अनाजों से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। मां चिल्टा आजीविका स्वायत्ता सहकारी समूह मुनार कपकोट मंडुवा से बिस्कुट बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में इस समूह की अभिनव पहल को सराहा था।
गांव की महिलाओं को जोड़ कर समूह बनाया और उन्हें आजीविका के लिए प्रोत्साहन किया। आजीविका में सहभागिता बढ़ने से महिलाओं को 8 से 10 हजार की आय प्राप्त हो रही है। प्रसाद बना कर समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। इस तरह के छोटे-छोटे उत्पाद बना कर पहाड़ों में रोजगार के नए अवसर पैदाकर पलायन रोका जा सकता है।
- दुर्गा करासी, अध्यक्ष, तुंगेश्वर स्वयं सहायता समूह चोपता
घर और खेतीबाड़ी के कामकाज के साथ केदारनाथ यात्रा का प्रसाद बनाने का कार्य मिला। इस कार्य से घर की आर्थिकी को बढ़ाने में काफी मदद मिल रही है। पहाड़ी अनाजों से विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाना महिलाओं व युवाओं के लिए आजीविका का साधन बन रहा है। सरकार को इस तरह के उत्पाद बनाने वाले समूहों को और प्रोत्साहन करने की जरूरत है।
- इंदु देवी, निवासी डांगी भरदार, जखोली
केदारनाथ यात्रा के दौरान पारंपरिक अनाज से तैयार किए गए प्रसाद से आठ हजार रुपये से अधिक की आमदनी हुई है। परिवार की जिम्मेदारी को निभारने के साथ ही प्रसाद को रोजगार के रूप में अपनाया है। सरकार को प्रदेश के अन्य मंदिरों में भी पारंपरिक अनाजों से तैयार प्रसाद को बेचने की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे महिलाओं व युवाओं को गांव में ही रोजगार मिलने से पलायन रुकेगा।
- सुमन देवी, तुंगनाथ उत्पादक समूह, जखोली
महिलाओं के समूह बनाकर झंगोरे के लड्डू बनाए जा रहे हैं। इनकी डिमांड बढ़ रही है। लड्डू बनाकर समूह से जुड़ीं कई महिलाओं की आजीविका चल रही है। अब मिठाईयों की दुकानों में भी झंगोरे के लड्डू बेचने की योजना पर समूह काम रहा है। इसके साथ ही समूह के माध्यम से सब्जी उत्पादन भी किया जा रहा है।
- सावित्री ममगाईं, अध्यक्ष, नागराजा स्वयं सहायता समूह कमेड़ा
मेरा मानना है कि पहाड़ों से पलायन रोकने और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए परंपरागत उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने की जरूरत है। पहाड़ी अनाजों से विभिन्न उत्पाद बनाना आजीविका का सबसे बड़ा साधन बन सकता है। इस दिशा में सरकार भी विशेष पहल कर रही है।
- कपिल उपाध्याय, विशेषज्ञ