वहीं कल शाम हुई झमाझम बारिश के बाद आज सुबह से देहरादून में बादल छाए रहे, जिससे लोग उमस से परेशान रहे। रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक घने बादलों के बीच हल्की बूंदाबांदी हुई। चमोली जिले में छिटपुट बादलों के बीच धूप खिली रही।
वहीं पिथौरागढ़ जिले में पहाड़ी दरकने से डीडीहाट-दूनाकोट सड़क फिर से बंद हो गई है। ग्रामीण बोल्डरों के ऊपर से जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। लोनिवि की जेसीबी बोल्डर और मलबा हटाने में जुटी है।
गौरतलब हो चार दिन पूर्व डीडीहाट-दूनाकोट सड़क के 12 किमी हिस्से में पहाड़ी दरक गई थी। 60 घंटे बाद बोल्डर और मलबा हटाकर सड़क को खोला गया था। उधर, मदकोट बाजार से गोरीपार के जौलढूंगा क्षेत्र को जोड़ने वाला मार्ग कई स्थानों में चट्टानें दरकने और मलबा आने से ध्वस्त हो गया है।
सड़क बंद होने से गोरीपार क्षेत्र के लोग भारी दिक्कतों में हैं। उधर, सोमवार तड़के मूसलाधार बारिश से टनकपुर-चंपावत मार्ग सुबह पांच बजे से साढ़े तीन घंटे बंद रहा। बस्तिया से ऊपर टिपन टॉप और अमरू बैंड के पास पर मलबा आने से मार्ग बंद हो गया। कार्यदायी ठेकेदार कंपनी ने जेसीबी से मलबा हटाकर मार्ग को खोला।
कोटद्वार नगर और आसपास के पर्वतीय इलाकों में सोमवार तड़के हुई मूसलाधार बारिश से कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य बरसाती गदेरा उफान पर रहा, जिससे करीब आधे घंटे तक राजमार्ग पर यातायात बाधित रहा। भारी बारिश भाबर से लछमपुर में एक गोशाला क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत यह रही कि इस दौरान कोई पशु हानि नहीं हुई।
सोमवार तड़के करीब चार बजे से क्षेत्र में मूसलाधार बारिश शुरू हुई। करीब एक घंटे की इस मूसलाधार बारिश के दौरान कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य चौथे मील पर बरसाती नाला उफान पर आ गया।
पानी के तेज बहाव में मलबा-पत्थर राजमार्ग पर आ गए, जिससे यातायात बाधित हो गया। लोनिवि की जेसीबी ने मलबा हटाकर मार्ग पर यातायात सुचारु किया।
दूसरी ओर, भाबर के लछमपुर गांव में जयभारत देवलियाल की गोशाला ध्वस्त हो गई। इस दौरान मवेशी बाहर बंधे हुए थे, जिसके चलते कोई पशु हानि नहीं हुई। बारिश के दौरान क्षेत्र में सभी सड़कें नालों में तब्दील हो गई।