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उत्तराखंड: पहाड़ से मैदान तक बारिश का कहर, नदी में बहीं तीन महिलाओं में से दो की मौत, एक लापता

Sun, 05 Jul 2020 10:30 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड में शनिवार देर रात से ही पहाड़ से मैदान तक बारिश हो रही है। मैदानी इलाकों में जहां मानसून की बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई वहीं, पहाड़ी इलाकों में मानसून अभी से कहर बरपा रहा है। रामनगर, नैनीताल, काशीपुर के साथ ही राजधानी देहरादून समेत आस पास के क्षेत्रों में भी बारिश से तापमान में गिरावट आई है।

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हरिद्वार में रविवार सुबह तेज बारिश से जगह-जगह जलभराव हो गया है। वहीं, कनखल के लाटो वाली कॉलोनी में भी पानी भरा गया है। बारिश के कारण चंडी देवी के पहाड़ से पत्थर भी गिर रहे हैं। इसके चलते रास्ता बंद हो गया है। 

गरमपानी में भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे जौरासी के पास कोसी नदी पार कर रहीं तीन महिलाएं बह गईं। दो महिलाओं के शवों को निकाल लिया गया, जबकि तीसरी का पता नहीं चल सका है। तीनों रविवार सुबह नौ बजे जंगल से घास लेकर लौट रही थीं।
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चमड़िया गांव निवासी कमला देवी (30) पत्नी राजेंद्र सिंह, लता देवी (26) पत्नी हरेंद्र सिंह बिष्ट और ललिता देवी (30) पत्नी दलीप सिंह घास काटने जंगल में गईं थीं। सुबह नौ बजे लौटते समय तीनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर कोसी नदी को पार कर रहीं थीं कि अचानक नदी में पानी बढ़ गया और तीनों बह गईं। स्थानीय दुकानदार आनंद सिंह की सूचना पर खैरना पुलिस, एसडीआरएफ, भवाली कोतवाली और कोश्याकुटौली की एसडीएम ऋचा सिंह राजस्व कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचीं।

एसडीआरएफ ने तीन घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। एसडीआरएफ की टीम के हेड कांस्टेबल लाल सिंह को कमला देवी का शव घटनास्थल से 400 मीटर दूर पत्थरों में फंसा मिला। लता देवी का शव एक किमी दूर से निकाला गया जबकि ललिता की तलाश में एसडीआरएफ और ग्रामीण लगे हुए हैं। 

उधर, बागेश्वर में 6 घंटे जबरदस्त बारिश हुई। इससे नदी-नाले उफना गए। घरों और दुकानों में पानी घुस गया। बागेश्वर में सरयू घाट जलमग्न हो गया। बागेश्वर जिले में ढालन-खुनौली, नामतीचेट्टाबगड़ समेत 10 सड़कें बंद हो गईं। तीन कलवर्ट क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कलनाबैंड-पंत क्वैराली, कपकोट-गैरखेत, ओखाधार-पापो, पालरीछीना-कराला पालड़ी, कठपुड़ियाछीना-सेराघाट, गरुड़-देवनाई,कांडा-मंतोली, बैड़ामझेड़ा सड़क भी बंद है। कई स्थानों में सड़कें बह गई हैं। कोसी में सिल्ट आने से जल संस्थान के तीनों पेयजल पंप 23 घंटे ठप रहे। इससे रविवार को भी अल्मोड़ा के कई मोहल्लों में पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी।


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वहीं, सीमांत जिले पिथौरागढ़ में मूसलाधार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भूस्खलन से मुनस्यारी के दाखिम, बेड़ीनाग के बिठौली कांडे किरौली में दो मकान खतरे की जद में आ गए। दिगालीचौड़ में एक घर के आंगन की दीवार ध्वस्त होने से मकान को खतरा पैदा हो गया है। थल- मुनस्यारी सड़क पर नया बस्ती और रातीगाड़ में लगातार मलबा गिर रहा है। रविवार सुबह नयाबस्ती में सड़क सुबह आठ बजे और रातीगाड़ में दस बजे हल्के वाहनों के खुली। चंपावत में बारिश से  लोहावती, गंडक नदी के अलावा कई नाले उफान पर आ गए। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग सुचारु रहा, लेकिन टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जिन जगहों में डामर नहीं हुआ, वहां आवाजाही जोखिमभरी बनी है। वहीं, तराई में सुबह डेढ़ घंटे हुई बारिश से जलभराव हो गया। ट्रांजिट कैंप में कुछ मकानों में बरसाती पानी घुस गया। 

बदरीनाथ और यमुनोत्री हाईवे बंद

पहाड़ में दो दिन से लगातार हो रही बारिश के कारण बदरीनाथ नेशनल हाईवे सुबह तोता घाटी और सकनिधार के बीच बंद हो गया है। बारिश से बदरीनाथ हाईवे पर पहाड़ी से पत्थर गिर रहे हैं। बता दें कि पीपलकोटी में  भनेरपाणी में चट्टान से मलबा और बोल्डर आने की वजह से बदरीनाथ हाईवे शनिवार को भी करीब 13 घंटे बाधित रहा था।

यमुनोत्री हाईवे का 10 मीटर हिस्सा बहा

बीती रात भर की बारिश के कारण जर्झरगाड़ में आए भारी पानी व मलबे से यमुनोत्री हाईवे का करीब 10 मीटर हिस्सा बह गया है, जिससे यमुनोत्री धाम सहित करीब एक दर्जन गांवों का संपर्क कट गया है। वहीं बारिश के कारण ओजरी डबरकोट में यमुनोत्री हाईवे व लालढांग के पास गंगोत्री हाईवे घंटों तक बाधित रहे, जिसे रविवार दोपहर तक बहाल किया गया। 

शनिवार शाम से रविवार सुबह तक भारी बारिश हुई, जिससे लालढांग के पास रविवार तड़के भूस्खलन होने से गंगोत्री हाईवे बाधित हो गया था, जिसे बीआरओ ने सुबह करीब सात बजे सुचारू किया। वहीं ओजरी डबरकोट में एक बार फिर भूस्खलन सक्रिय होने से यमुनोत्री हाईवे भी शनिवार शाम करीब 6 बजे बाधित हो गया, जिससे यमुनोत्री धाम की यात्रा से लौट रहे नौ तीर्थयात्री रातभर स्यानाचट्टी क्षेत्र में फंसे रहे। एनएच के कर्मचारियों ने भारी मशक्कत कर रविवार दोपहर करीब एक बजे यातायात बहाल किया। 

इसके अलावा भारी बारिश से रानाचट्टी व हनुमान चट्टी के बीच जर्झरगाड़ में भारी पानी व मलबा आने से यमुनोत्री हाईवे का करीब 10 मीटर हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया है। रविवार को यमुनोत्री धाम की यात्रा पर जा रहे दो तीर्थयात्री भी राना चट्टी में फंसे हैं। एनएच के ईई नवनीत पांडे ने बताया कि ओजरी डबरकोट क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही बहाल कर दी गई है, लेकिन जर्झरगाड़ के पास सड़क बहने से रानाचट्टी के आगे अभी भी यातायात बंद है। 

भूस्खलन से मकान क्षतिग्रस्त, बाल-बाल बचे परिवार के सदस्य

कर्णप्रयाग में शनिवार रात मूसलाधार बारिश के कारण पूरे क्षेत्र में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। भूस्खलन से उत्तरों (लंगासू) गांव में एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि परिवार के चारों सदस्य समय रहते घर से बाहर निकल गए। प्रशासन ने प्रभावित परिवार को प्राइमरी स्कूल में ठहराया है। वहीं लंगासू में हाईवे पर एक जेसीबी भी मलबे में दब गई। बदरीनाथ हाइवे के किनारे कई जगह मलबा गिरा है। पहाड़ी से गिरे पत्थरों से कालेश्वर में एसजीआरआर का गेट क्षतिग्रस्त हो गया है।

भीषण गर्मी के बाद दो दिनों से लगातार हो रही बारिश पहाड़वासियों के लिए आफत बनकर बरस रही है। लंगासू के पटवारी प्रदीप रावत ने बताया कि रात करीब साढ़े 11 बजे उत्तरों गांव के पंकज कुमार पुत्र संतलाल के मकान के ऊपरी भाग में खेतों से मलबा और पत्थर आ गिरे। छत पर पत्थर गिरने की आवाज से परिवार मकान से बाहर आ गया।
नायब तहसीलदार गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि प्रभावित परिवार को गांव के स्कूल में ठहराया गया है।

वहीं दूसरी ओर लंगासू बाजार के कैलाश खंडूड़ी के घर भी बारिश के पानी के साथ पहाड़ी का मलबा घुस गया। कैलाश ने बताया कि परिवार के सदस्यों ने मुश्किल से रात के अंधेरे में किसी तरह घर से बाहर निकलकर जान बचाई। इसके अलावा कर्णप्रयाग-नैनीसैंण सड़क मलबा आने के कारण करीब तीन घंटे बंद रही। बाद में जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर यातायात बहाल किया गया। 

कर्णप्रयाग में भी घरों में घुसा मलबा, खेत बहे
बारिश के दौरान गांधीनगर और बहुगुणानगर स्थित कई लोगों के घरों में मलबा घुस गया। ईश्वरी मैखुरी और जगदीश सेमवाल ने बताया कि एनएच ने सड़क किनारे नालियां नहीं बनाई हैं, जिससे मुश्किल बढ़ गई हैं। कालेश्वर और जेकिंडी में भी लोगों के मकानों में सड़क का पानी भर गया। बारिश से सुनाली और जेंटी गांवों में लोगों के खेत बह गए। कई खेतों में मलबा भर गया। टटासू और धारडुंग्री गांव में भी लोगों को नुकसान हुआ है।

हमने सभी प्रभावित स्थानों पर जाकर मौका मुआयना किया है। इन दिनों कई जगह नालियाें और दीवारों का निर्माण कार्य चल रहा है। खतरनाक स्थल चिन्हित किए गए हैं, वहां काम तेजी से चल रहा है।
-संदीप कार्की, जीएम, नेशनल हाईवे। 

पहाड़ी से गिरे बोल्डर की चपेट में  आकर युवती गंभीर घायल

नौगांव में पहाड़ी से गिरे बोल्डर की चपेट में आने से भंकोली गांव निवासी एक युवती गंभीर घायल हो गई। प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक भंकोली गांव की रसिका (20), पुत्री मदन बुटोला रविवार दोपहर मुख्य बाजार के नजदीक लगे हैंडपंप से पानी भरकर लौट रही थी। इसी दौरान वह पहाड़ी से गिरे एक बोल्डर की चपेट में आ गई। 

घटना के तत्काल बाद परिजन उसे लेकर सीएचसी, नौगांव पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर देहरादून रेफर कर दिया गया। एमओ डॉ. निधि रावत ने बताया कि युवती के पैर में फ्रैक्चर हुआ है। 

व्यापार मंडल अध्यक्ष जगदीश असवाल का कहना था कि कि बरसात के दिनों में इस पहाड़ी से अक्सर बोल्डर गिरते हैं। पहाड़ी के नीचे मौजूद हैंडपंप से पानी भरने के लिए स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ व्यापारियों की भी भीड़ रहती है।

गनीमत रही कि रविवार को साप्ताहिक अवकाश के कारण घटना के वक्त वहां भीड़ मौजूद नहीं थी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने प्रशासन से पहाड़ी का ट्रीटमेंट कराने के साथ ही घायल युवती के परिजनों को भी उचित मुआवजा देने की मांग की। 
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भारत ने मिसाल पेश कर 13 लोगों को नेपाल भेजा

नेपाल के बझांग जिले में भूस्खलन के बाद जिंदा दफन होने और कई परिवारों के सड़क पर आने से भारत में रह रहे उनके रिश्तेदारों को नेपाल भेजने के लिए रविवार को सीमा पुल खुला गया। पुल से 13 लोग अपने वतन लौटे।

भारत-नेपाल मैत्री रिश्तों को बढ़ावा देने के लिए भारत ने एक बार फिर से मजबूरी में फंसे नौ पुरुष, एक महिला और तीन बच्चों को नेपाल भेजा। बझांग में शुक्रवार रात भूस्खलन से कई परिवार सड़क पर आ गए हैं। इन परिवार वालों ने सीडीओ बझांग के माध्यम से पिथौरागढ़ डीएम से मदद मांगी थी। रविवार दोपहर 1.35 बजे पुल को  20 मिनट के लिए खोला गया। एसएसबी के निरीक्षक रनवीर सिंह ने बताया सभी लोगों का मेडिकल जांच कराने के बाद नेपाल भेजा गया। मेडिकल टीम में डॉ. प्रकाश पंगरिया मौजूद रहे। 

उधर, बनबसा सीमा से 137 लोगों की हुई वतन वापसी
लॉकडाउन में भारत और नेपाल में फंसे प्रवासी नागरिकों की वतन वापसी का क्रम रविवार को भी जारी रहा। रविवार को बनबसा सीमा से 137 लोग अपने वतन लौटे। इमिग्रेशन चेकपोस्ट अधिकारी इंद्र सिंह ने बताया कि रविवार को नेपाल से 38 भारतीय बनबसा के रास्ते स्वदेश लौटे, जबकि भारत के विभिन्न प्रांतों से नेपाल जाने के लिए बनबसा पहुंचे 99 प्रवासी नेपाली लोगों ने अपने वतन का रुख किया।
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