घाट से पिथौरागढ़ तक कई जगह बंद बारहमासी सड़क 60 घंटे बाद खुल गई है, जिससे टनकपुर से पिथौरागढ़ तक आवागमन शुरू हो गया है, लेकिन अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग अभी बंद है। हाईवे खुलने पर सब्जी, रसोई गैस, ईंधन से भरे वाहन पिथौरागढ़ मंगलवार को पहुंच गए हैं, जिससे प्रशासन और लोगों ने राहत की सांस ली।
बीते दिनों हुई भारी बारिश के कारण पिथौरागढ़ जिले की 22 ग्रामीण सड़कें और चीन सीमा को जोड़ने वाली पांच सड़कें नहीं खुल सकीं हैं। लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण सड़कों को खोलने में दिक्कतें हो रही हैं। चीन सीमा को जोड़ने वाली घट्टाबगड़-लिपुलेख, तवाघाट-घट्टाबगड़, तवाघाट-सोबला, गुंजी-कुटी-ज्योलिंगकांग, जौलजीबी-मुनस्यारी और सोबला-दर तिंदाग सड़कें बंद हैं। जिससे चीन सीमा से पूरी तरह संपर्क कटा है। राहत की बात यह है कि टनकपुर-पिथौरागढ़ मार्ग पर आवागमन शुरू हो गया है। सोमवार रात सवा नौ बजे एनएच में यातायात बहाल हुआ, लेकिन मंगलवार को दिन में करीब एक बजे सड़क पर मलबा आने के कारण करीब तीन घंटे आवाजाही फिर बंद रही, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कार्यदायी संस्थाओं ने किसी तरह सड़क को खुलवाकर वाहनों की आवाजाही शुरू करवाई।
चंपावत जिले की 13 ग्रामीण सड़कें अब तक नहीं खोली जा सकीं हैं। इन सड़कों के बंद रहने से 35 गांवों के तीन हजार लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। हालांकि, इन गांवों में अभी खाद्यान्न की दिक्कत नहीं है, लेकिन यहां के लोग टीकाकरण के लिए अपने केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इधर, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग मंगलवार को चौथे दिन भी नहीं खुल सका। बारिश रुकने के बाद भी अल्मोड़ा जिले के छह ग्रामीण और आंतरिक मोटर मार्ग पूरी तरह बंद हैं। बागेश्वर जिले की कपकोट-शामा-तेजम, सिरलोनी-लोहागड़ी, कंधार-रौलियाना-सिमखेत, बीनातोली-कुंझाली और बघर सड़क पर मंगलवार को भी यातायात बाधित रहा। मलबा, बोल्डर गिरने और सड़क दरकने के कारण यह पांचों सड़कें पिछले तीन दिन से बंद हैं। वहीं कर्मी, रिखाड़ी-बाछम, शामा-लीती-गोगिना सड़क में मंगलवार को यातायात बहाल हो गया है।
अलग-थलग पड़ा जिले का अंतिम गांव नामिक
पिथौरागढ़ जिले के अंतिम गांव नामिक को जोड़ने वाला रामगंगा नदी पर बना झूला पुल खतरे की जद में आ गया है। इस गांव को जाने वाला 80 मीटर पैदल रास्ता भी बह गया है। पुल की सुरक्षा के लिए बनाए गए आठ तटबंध बह गए हैं जबकि आठ खतरे की जद में हैं। गांव के लिए बनी नामिक जल विद्युत परियोजना की 10 मीटर नहर भी बह गई है। इस कारण गांव में विद्युतापूर्ति ठप हो गई है। मानसून काल को देखते हुए जुलाई से नवंबर तक की खाद्यान्न सामग्री गांव पहुंचाई जानी थी, लेकिन वहां पूरा राशन नहीं पहुंच पाया है। गांव में सिर्फ आधा राशन ही पहुंचाया जा सका है।
बचे हुए राशन को बागेश्वर जिले के गोगिना गांव में रखा गया है। खाद्य निरीक्षक मोहित खड़ायत ने बताया कि खाद्यान्न की स्थिति देखने के लिए उन्होंने नामिक गांव का निरीक्षण किया। गांव में जून तक का राशन पहुंचा दिया है। यहां से 30 परिवार माइग्रेशन पर गए हैं उन्हें भी माइग्रेशन से लौटने के बाद खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध करा दी जाएगी। ठेकेदार को एक सप्ताह के भीतर खच्चरों से नामिक गांव तक खाद्य सामग्री पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
कई पुल बहने से 60 गांव अलग-थलग पड़े
लगातार हुई भारी बारिश के कारण मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला क्षेत्र में दो मोटर पुल खतरे की जद में आ गए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से कई पैदल और मोटर पुल बह गए हैं। चीन सीमा से लगा कंज्योती में सोबला और दारमा घाटी को जोड़ने वाला पक्का पुल और सोबला में सीपीडब्लूडी का सीमेंट का अस्थायी पुल भी बह गया है। पैदल और मोटर पुल बहने से लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। बंगापानी और मुनस्यारी तहसील में दो ट्रॉलियां भी बह गई हैं। इससे लोग काफी परेशान हैं। पैदल और मोटर पुलों के बहने से सीमांत के 60 से अधिक गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। लोगों ने शीघ्र पुलों का निर्माण कर क्षतिग्रस्त पुलों को ठीक करने की मांग की है।
एक सप्ताह से दारमा घाटी के गांवों में फंसे अधिकारियों और कर्मचारियों को हेलीकॉप्टर से धारचूला लाया गया। कई गांवों से एक जच्चा बच्चा और दो बीमार बुजुर्गों को भी धारचूला लाया गया। आपदा काल में दारमा घाटी के विभिन्न गांवों में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर से निकाला जाएगा।
दारमा घाटी के ग्रामीणों को कौशल विकास और स्वरोजगार का प्रशिक्षण देने के लिए पशुपालन और उद्यान विभाग सहित विभिन्न विभागों के 20 अधिकारी और कर्मचारी दारमा घाटी के दुग्तू और ढांकर गांव गए थे। इसी दौरान मूसलाधार बारिश के कारण सड़क और पुलों के ध्वस्त होने से सभी घाटी में ही फंस गए। इससे कर्मचारियों के साथ ही परिजन भी परेशान थे।
आपदा काल में फंसे अधिकारियों के साथ ही अन्य ग्रामीणों को सुरक्षित लाने के लिए डीएम आनंद स्वरूप ने राज्य सरकार से हेलीकॉप्टर की मांग की थी। मंगलवार को हेलीकॉप्टर धारचूला पहुंचा। इसके बाद कुल छह चक्कर में 22 लोगों को धारचूला लाया गया। इनमें नागलिंग गांव से दो दिन का जच्चा-बच्चा, बूंदी गांव से दो बीमार बुजुर्ग भी शामिल रहे। हेलीकॉप्टर से दारमा घाटी के सेला गांव में 10 पैकेट खाद्यान्न भी पहुंचाए गए। बुधवार को भी बचाव अभियान जारी रहेगा।
मिलम के बीमार को हेलीकॉप्टर से लाने की मांग
मुनस्यारी के मल्ला जोहार स्थित मिलम में बीमार व्यक्ति को हेली से लाने की मांग की गई है। मिलम में जगत सिंह निखुर्पा पैरालाइज हो गए हैं। उनके उपचार के लिए परिजन परेशान हैं, लेकिन लास्पा, बुगडियार पुल एवं मापांग में पैदल मार्ग ध्वस्त होने के कारण उन्हें मुनस्यारी लाना संभव नहीं है। मल्ला जोहार विकास समिति अध्यक्ष श्रीराम सिंह धर्मशक्तू ने प्रशासन से बीमार को नीचे लाने के लिए हेलीकॉप्टर की मांग की है। एसडीएम अभय प्रताप सिंह ने बताया कि हेली के लिए डीएम संपर्क हो गया है। मरीज को हेली से मिलम से लाया जाएगा। इस मामले में विधायक हरीश धामी ने भी प्रशासन से भी शीघ्र बीमार को हेली से लाने की मांग की है। मंगलवार को मौसम खराब होने के कारण उसे हेली से नहीं लाया जा सका।
देवाल-वाण सड़क पिछले एक सप्ताह से जगह-जगह बंद होने से ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतें आ रही हैं। खासकर बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना ग्रामीणों के लिए चुनौती बना है। दो दिनों से वाण गांव के भाग सिंह की बेटी बुखार से पीड़ित थी, लेकिन रास्ता बंद होने पर बीमार को बाइक के सहारे मलबे और बोल्डर के बीच जान जोखिम में डालकर अस्पताल पहुंचाया गया।
देवाल क्षेत्र में तीन दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण देवाल-वाण सड़क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गई है। जबकि यह सड़क पल्या, करजा, बुराकोट और मैला स्थान पर एक सप्ताह से बंद पड़ी है, जिससे आवाजाही का संकट बना हुआ है। वाण गांव के भाग सिंह की चार वर्षीय बेटी नतिशा को तेज बुखार था। मंगलवार को नतिशा की तबियत ज्यादा बिगड़ गई तो परिजन उसे पैदल ही 15 किलोमीटर दूर लोहजंग ले जा रहे थे, लेकिन गांव के हीरा सिंह गढ़वाली ने सड़क पर आए मलबे और बोल्डरों के बीच जान हथेली पर रखकर बाइक से ही नतिशा को लोहजंग में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
अब नतिशा की तबीयत ठीक है। नतिशा को अस्पताल पहुंचाने वाले हीरा सिंह गढ़वाली ने बताया कि वर्ष 2018 की आपदा के बाद से वाण सड़क की स्थिति दयनीय है। बुराकोट जगह पर भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आने से सड़क बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है।
लोहाजंग में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं
ग्राम प्रधान पुष्पा देवी, जिला पंचायत सदस्य कृष्णा सिंह, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हीरा सिंह, देवेंद्र सिंह, हीरा सिंह गढ़वाली, मोहन सिंह और भगत सिंह ने कहा कि वाण सड़क एक सप्ताह से बंद है, लेकिन अभी तक भी लोनिवि की ओर से सड़क को खोलने के लिए जेसीबी नहीं भेजी गई है। कहा गया कि लोहाजंग में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोहजंग में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं खुल पाया है।