थत्यूड़ (टिहरी) में जौनपुर ब्लॉक के चडोगी गांव के एक युवक के ऊपर बज्रपात गिरने से मौत हो गई। चडोगी गांव निवासी कुंदन सिंह ने जंगली जानवरों से मक्के की खेती की सुरक्षा के लिए गांव से कुछ दूर गुरमीधार में मचान बनाया हुआ था।
बीती रात को उनका बेटा सूरज ङ्क्षसह (20) खेतों में आने वाले जंगली जानवरों को भगाने के लिए मचान में अकेला सोया हुआ था। रात दो-तीन बजे के लगभग क्षेत्र में जमकर बारिश हुई। इस दौरान मचान के ऊपर गिरे बज्रपात से सूरज सिंह की मौत हो गई है।
सुबह जब सूरज घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी ढूंढ खोज की। मचान ब्रजपात से पूरा जला हुआ था। वहीं सूरज का शव बरामद हुआ। नैनबाग तहसीलदार जालम सिंह राणा ने बताया कि मृतक का पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए मसूरी भेजा गया है।
थराली में मसूलाधार बारिश होने से एक पुलिया बह गई
चमोली में बुधवार रात हुई बारिश आज सुबह छह बजे थमी। यहां थराली में मसूलाधार बारिश होने से एक पुलिया बह गई और दो पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए। कुरालु गांव में एक गोशाला भी क्षतिग्रस्त हुई है। मलबे में तीन पशु दब गए। वहीं एक भवन आंशिक रूप से ध्वस्त हुआ है।
बदरीनाथ हाईवे कई जगह मलबा आने से बंद हो गया है। हाईवे छीनका, क्षेत्रपाल, भनेरपानी, कालीमंदिर, टंगड़ी, पागलनाला, हेलंग और लामबगड़ में बंद है। नंदप्रयाग-कोठियालसैण सड़क भी बंद है। जिससे अलग-अलग धाम जा रहे करीब 125 यात्री हाईवे खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
बड़कोट में यमुनोत्री घाटी में बादल छाए हुए हैं। यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है। मार्ग पर आवाजाही बहाल करने के लिए लोनिवि के मजदूर लगे हुए हैं।
रेड अलर्ट जारी करने के साथ ही संबंधित जिलों के लिए सावधानी की सलाह देते हुए प्रशासन को आवश्यक सुरक्षा उपाय करने की भी सलाह दी गई है। अधिक ऊंचाई वाले और पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा तेज बारिश से भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का खतरा भी जताया गया है। उत्तराखंड मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि अगले दो दिन प्रदेश में ज्यादातर स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।
भारी बारिश की चेतावनी पर प्रशासन अलर्ट
मौसम विभाग द्वारा जिले में दो दिन की भारी बारिश के चेतावनी को लेकर हुए प्रशासन अलर्ट हो गया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
देहरादून जिले में अगले दो दिन भारी बारिश की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। इस पर डीएम ने किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल स्थलीय कार्रवाई करते हुए सूचनाओं का आदान-प्रदान करने को कहा है।
साथ ही नोडल अधिकारियों को अलर्ट रहने को कहा है। एनएच, पीडब्ल्यूडी, एडीबी, सीपीडब्ल्यूडी आदि को मोटर मार्ग बाधित होने पर तुरंत उसे खुलवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान कोई भी अधिकारी और कर्मचारी अपने फोन बंद नहीं रखेगा। साथ ही लोगों के फंसे होने की स्थिति में खाद्य सामग्री और मेडिकल की व्यवस्था भी करने के निर्देश दिए।
मलबा हटाने और नाले की सफाई में लगा निगम
बीते दिनों हुई भारी बरसात के चलते घरों में मलबा व पानी घुसने तथा नाला चोक होने के बाद से नगर निगम सफाई अभियान में जुटा हुआ है। इसे लेकर कई जेसीबी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सफाई में लगी हैं। वहीं, मलबा भी हटाया जा रहा है। इसके अलावा पंपिंग सेट के जरिये जलभराव वाले स्थानों से पानी भी निकाला जा रहा है।
पिछले दिनों भारी बारिश के कारण प्रदेश में चार राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 311 सड़कें बंद हो गई थीं। कई सड़कें ध्वस्त हो गई थीं। 212 सड़कें पहाड़ों से मलबा आने से बाधित हो गई थीं। दावा किया गया है कि मंगलवार तक इनमें से 99 सड़कों को खोल दिया गया है। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक, सड़कों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
बदरीनाथ, यमुनोत्री, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग गौरी कुंड हाईवे कुछ स्थानों पर चट्टानें आ जाने के कारण बंद रहा। बीआरओ, लोनिवि और आलवेदर रोड परियोजना की कार्यदायी एजेंसियों की मदद से मार्ग खोलने के प्रयास जारी हैं। कुछ स्थानों पर छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए मार्ग खुलने की संभावना है।
बारिश के कारण नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और जिला मोटर मार्गों के अलावा ग्रामीण सड़कों को भी भारी नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर सड़कें टूट गई हैं तो कई जगहों पर पुलों को भी क्षति पहुंची है।
अनुमान है कि इन सभी सड़कों व पुलों को पुरानी अवस्था में लाने के लिए 60 करोड़ से अधिक की धनराशि की आवश्यकता होगी। लोनिवि के विभागाध्यक्ष हरिओम शर्मा के मुताबिक, सड़कों को खोलने के लिए 310 मशीनों को तैनात किया गया है।
कुमाऊं में भारी बारिश का कहर जारी है। बागेश्वर जिले में तीन और मकान ध्वस्त हुए हैं, जबकि कई खतरे की जद में हैं। पीड़ितों ने दूसरी जगहों पर शरण ली हुई है। भारी बारिश से तमाम नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। लगातार हो रही बारिश ने संवेदनशील स्थानों के लोग दहशत में हैं।
पर्वतीय जिलों में एनएच समेत अब भी बड़ी संख्या में सड़कें बंद हैं। पिथौरागढ़ जिले में बार्डर को जोड़ने वाली तीन सड़कों समेत 25, बागेश्वर में 26, चंपावत जिले में सात और नैनीताल जिले में 15 मोटर मार्ग बंद पड़े हैं।
मूसलाधार बारिश से पिथौरागढ़-तवाघाट, तवाघाट-सोबला और थल-मुनस्यारी सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गए। धारचूला में नौगांव के पास एलधार में भारी बारिश के बाद एक मकान ध्वस्त हो गया, दस खतरे की जद में हैं। चंपावत जिले में टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बृहस्पतिवार को चार जगह घंटों बंद रहा। बृहस्पतिवार सुबह बारिश के बाद एनएच में सुबह करीब छह बजे से मलबा आने से कई बार आवाजाही ठप रही।
बागेश्वर में जिले में बुधवार रात और बृहस्पतिवार सुबह हुई भारी बारिश से तीन और मकान ध्वस्त हुए हैं, जबकि दो मकानों को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। ग्वाड़ गांव में कई मकान खतरे की जद में आ गए हैं। बागेश्वर के 44 गांवों में बुधवार से बिजली गुल है। नैनीताल में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित रहा। बारिश से जीवनदायिनी नैनी झील का जलस्तर भी आठ इंच तक बढ़ गया है। जिले के कुल दो एनएच समेत 15 मोटर मार्ग बंद हैं।