पूर्णागिरी मार्ग पर आया मलबा
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चकराता की ऊंची पहाड़ियों पर पड़ी बर्फ की फुहारें
ऊंची पहाड़ियों पर बर्फ की फुहारें पड़ने और क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई है। छावनी बाजार चकराता सहित समूचे जौनसार बावर क्षेत्र में शीतलहर का प्रकोप जारी है। बीती सोमवार की देर रात्रि से रुक-रुक शुरू हुआ बारिश का सिलसिला मंगलवार को भी दोपहर तक जारी रहा। बारिश से गिरे तापमान के कारण चकराता क्षेत्र की ऊंचाई वाले इलाकों लोखंडी, बुधेर, खड़बा, मोईला टॉप, कोटी कनासर आदि की पहाड़ियों पर बर्फ की फुहारें पड़ी। लोग ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं।
छावनी बाजार में व्यवसाय से जुड़े अरविंद जैन, अनिल चौहान, सुनील जोशी, प्रदीप जोशी, सिट्टू चौहान आदि ने बताया कि बीते एक सप्ताह से छावनी बाजार में लगातार हो रही बारिश से जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। आसपास के गांवों के लोग भी बारिश के चलते खरीदारी करने बाजार में नहीं पहुंच रहे हैं। जिस कारण बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है। उन्होंने बताया कि लगातार हो रही बारिश से मार्च में दिसंबर माह का अहसास हो रहा है।
बारिश के चलते चकराता का न्यूनतम तापमान 3 डिग्री रहा। पछवादून के विकासनगर में भी मंगलवार को दोपहर तक बारिश का सिलसिला जारी रहा। हालांकि शाम चार बजे मौसम साफ हो गया। धूप निकलने से लोगों ने राहत महसूस की।
बागवानी प्रभावित होने की आशंका
वहीं बागवान महाबल सिंह नेगी, जगतराम नौटियाल, बृजेश जोशी आदि का कहना है कि कम ऊंचाई वाले इलाकों में सेब, चुल्लू, खुमानी, पुलम के बगीचों में अब फ्लोरिंग का समय आ चुका है। अच्छे उत्पादन के लिए तापमान की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि बारिश जारी रही तो फ्लोरिंग की प्रक्रिया प्रभावित होगी।
कुमाऊं में जहां तहां मलबा आने से यातायात हुआ अवरुद्ध
समूचे कुमाऊं में बेमौसम बरसात से हालात विषम हो गए हैं। किसानों की मेहनत पर जहां इस बारिश ने पानी फेर दिया है। पहाड़ी इलाकों में जहां बागवानी को नुकसान हुआ है वहीं तराई भाबर में गेहूं और सरसों पर पानी फिर गया है। इस बारिश से आम जन को तरह-तरह की दुश्वारियां झेलनी पड़ रहीं हैं। मंगलवार को सड़कों पर जहां तहां मलबा आने से यातायात बाधित हो गया। टनकपुर में सरस मेला स्थल पर जलभराव से यहां स्टाल लगाने वाले व्यापारियों को काफी हानि हुई है। बाटनागाड़ में नाले के उफान में आने से करीब चार घंटे यातायात बाधित रहा। बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात हुआ है। व्यास और दारमा घाटी में आधे से एक फीट तक बर्फबारी हुई है।
चंपावत में विश्राम घाट और कोट अमोड़ी और टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलबा आने से कई स्थानों पर यातायात बाधित रहा। टनकपुर में मां पूर्णागिरि धाम मार्ग पर बाटनागाड़ में चार घंटे मार्ग बंद रहा। दोपहर बाद मौसम खुलने के बाद श्रद्धालुओं को राहत मिली। बारिश से बागेश्वर समेत अन्य इलाकों में जंगलों में लगी आग बुझ गई है। इससे वन विभाग ने राहत की सांस ली है। बारिश से बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्र- छात्राओं को खासी परेशानी हुई।
ऊधमसिंह नगर जिले और नैनीताल जिले के भाबर इलाके में गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ है। रुद्रपुर में सहायक कृषि अधिकारी व पटवारियों को फसल के नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। बारिश से गेहूं की गुणवत्ता व उत्पादन प्रभावित होने की आशंका। जिले में 1.8 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में गेहूं और 5000 हेक्टेयर में सरसों बोई गई है। वहीं रुद्रपुर शहर में जगह-जगह जलभराव रहा। जी-20 की तैयारियों को लेकर डाली गई मिट्टी से हर जगह कीचड़ फैल गया। नैनीचाल में लगातार बारिश के चलते बैंड स्टैंड के समीप क्षतिग्रस्त दीवार से लगी एक और दीवार को खतरा पैदा हो गया है। कौसानी, गरुड़, बैजनाथ में 24 घंटे से लगातार बारिश हो रही है।
कहां कितनी बारिश
अल्मोड़ा में पिछले 24 घंटों में 8.5 एमएम तो जैंती में सबसे अधिक 26 एमएम बारिश हुई। वहीं नैनीताल जिले में पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा हल्द्वानी में 38 एमएम बारिश हुई। वहीं बेतालघाट में सबसे कम 8.2 एमएम बारिश हुई। ऊधमसिंह नगर जिले में मंगलवार को औसतन 25 एमएम जबकि खटीमा में सबसे अधिक 37 मिमी और बाजपुर में सबसे कम 04 मिमी बारिश हुई। रुद्रपुर और काशीपुर में 21-21 एमएम बारिश दर्ज की गई। पिथौरागढ़ जिले में सर्वाधिक 10 मिमी डीडीहाट और सबसे कम छह मिमी पिथौरागढ़ में हुई।