विरोध के प्रमुख कारण
-संख्या सीमित होने से होटल-ढाबा कारोबार प्रभावित होगा।
-कश्मीर में पर्यटन खुल जाने के बाद यात्रियों की संख्या कम होने की संभावना
- स्थानीय लोगों ने बैंक से ऋण लेकर होम स्टे और होटल-रेस्टोरेंट खोले हैं, यात्री कम आएंगे तो व्यापार में कमी आएगी।
-स्थानीय लोगों के ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था से भी दिक्कतें बढ़ेंगी।
सरकार का तर्क
-संख्या सीमित न होने से चारों धामों में जुटने वाली भीड़ से दुर्घटना का खतरा
-भौगोलिक कठिनाइयों और सीमित सुविधाओं के चलते व्यवस्था प्रभावित होगी
-सीमित संख्या होने से यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सहज प्रबंधन हो सकेगा
-सीमित संख्या का भीड़ प्रबंधन करना आसान होगा और यात्री मंदिरों में सुरक्षित और सहज ढंग से दर्शन कर सकेंगे।
धामों के प्रबंधन पर पीएमओ की भी नजर
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में यात्रा और यात्रियों के प्रबंध पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की भी नजर है। यही वजह है कि प्रदेश सरकार को धामों की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष ध्यान देना पड़ रहा है।
26 मार्च को हितधारकों के साथ होगी बैठक
शासन ने 26 मार्च को चारधाम यात्रा से जुड़े हितधारकों के साथ बैठक बुलाई है। बैठक में हितधारकों से जुड़े मसलों पर चर्चा की जाएगी। इसमें चारधाम यात्रा में यात्रियों की संख्या सीमित न करने और स्थानीय लोगों के रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग पर बातचीत होगी।
चारधाम यात्रा 22 अप्रैल से शुरू हो रही है। हमने मुख्य सचिव से यात्रियों की संख्या सीमित न किए जाने का अनुरोध किया है। साथ ही स्थानीय लोगों को पंजीकरण से बाहर रखने की मांग की गई है। हमें उम्मीद है कि सरकार हमारी मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
- डॉ. बृजेश सती, महासचिव, चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत
हमने 26 मार्च को बैठक बुला ली है। बैठक में सभी मसलों पर चर्चा होगी और इनके सकारात्मक समाधान निकाले जाएंगे। सरकार की यह सर्वोच्च प्राथमिकता है कि चारधाम यात्रा से जुड़ी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
- सचिन कुर्वे, सचिव पर्यटन