अधिक हिमपात होने पर अस्थायी ग्लेशियर भी बनते थे। जमीन पर लंबे समय तक नमी बनाए रखने के साथ ही स्थानीय गाड़, गधेरों को रीचार्ज करने में ग्लेशियर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ट्रैकिंग पर जाने वाले पर्यटकों के लिए यह अस्थायी ग्लेशियर मुख्य आकर्षण का केंद्र रहते हैं। कम हिमपात के कारण इस साल अस्थायी ग्लेशियरों की संख्या भी सीमित रहने का अनुमान है। जो ग्लेशियर बने हैं, उनकी बर्फ तेजी से पिघल जाएगी।
कुछ समय पूर्व तक पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात होने पर छिपला की पहाड़ी भी बर्फ से ढकी रहती थी। इसके बाद पिथौरागढ़ शहर के नजदीकी थलकेदार के जंगल तक हिमपात हो जाता था। बर्फ अधिक गिरती है तो उसके पिघलने का क्रम धीमा रहता है। इससे धरती में नमी बनी रहती है। मौसम अब असामान्य हो गया है। इसका प्रमुख कारण नदियों को रोकना, माइनिंग और वनों का अत्यधिक दोहन है। जलवायु परिवर्तन का संकेत है, लेकिन इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया गया है।
- डॉ. शेखर पाठक, पद्मश्री एवं हिमालय के अध्ययनकर्ता।