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Uttarakhand Weather: दोपहर बाद बदला मौसम, टिहरी और बागेश्वर के ऊपरी इलाकों में जमकर हुई ओलावृष्टि और हिमपात

Sun, 12 Mar 2023 09:04 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी

सार

ऊपली रमोली क्षेत्र के ओनालगांव में ओलावृष्टि हुई है। ओलावृष्टि होने से सेब, नाशपाती ,आडू, खुमानी और अन्य फलदार पेड़ों को नुकसान पहुंचा है।
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टिहरी के ऊपरी इलाकों में ओलावृष्टि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड में दोपहर बाद मौसम ने करवट बदली। टिहरी जिले के प्रताप नगर और भिलंगना ब्लाक क्षेत्र में बारिश शुरू हो गई। वहीं, ऊपली रमोली क्षेत्र के ओनालगांव में ओलावृष्टि हुई है। ओलावृष्टि होने से सेब, नाशपाती ,आडू, खुमानी और अन्य फलदार पेड़ों को नुकसान पहुंचा है। ऊपली रमोली क्षेत्र के ओनालगांव में ओलावृष्टि हुई है।

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पिथौरागढ़ की चोटियों पर हिमपात

बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले की ऊंची चोटियों पर रविवार को हिमपात हुआ। वहीं कई इलाकों में बूंदा बांदी और ओले भी गिरे। इससे फल-फूलों को नुकसान हुआ है। बागेश्वर जिले में मौसम ने रविवार को अचानक करवट बदली। बागेश्वर में रविवार सुबह से ही हल्के बादल छाए थे। शाम करीब चार बजे बाद फुर्किया, चिल्ठा, जांतोली की ऊंची चोटियों पर हल्का हिमपात होेने लगा। शाम करीब पांच बजे बाद कांडा तहसील मुख्यालय के साथ ही कई इलाकों में काफी देर तक ओलावृष्टि हुई।

इससे बौर झड़ गए। सब्जियों को भी नुकसान हुआ। ओलावृष्टि से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। बागेश्वर की जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल के अनुसार गरुड़ क्षेत्र में भी हल्की से मध्यम बारिश हुई है। मौसम विज्ञान विभाग ने रविवार दोपहर में अलर्ट जारी कर बागेश्वर जिले के साथ ही कई पहाड़ी जिलों में गरज के साथ बारिश का अंदेशा जताया था।

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उधर, पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी के हंसलिंग और राजरंभा चोटियों पर हल्का हिमपात हुआ। जिला मुख्यालय में रविवार को हल्के बादल छाए रहे, जबकि शाम को बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई देती रही। अस्कोट में दोपहर तीन बजे एक घंटे तक बारिश हुई। मुवानी, झूलाघाट, नाचनी में हल्की बूंदाबांदी हुई। गणाईगंगोली में ओलावृष्टि के साथ तेज बारिश होने से फल - फूलों को नुकसान हुआ है। गंगोलीहाट में भी गरज के साथ छींटे पड़े।

पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर रहने से उत्तराखंड में 63 फीसदी कम हुई बारिश

पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर रहने से उत्तराखंड में इस साल शीतकाल में महज 37.6 मिमी बारिश ही हुई है। यह बारिश सामान्य से 63 प्रतिशत कम है। पिछले साल की तुलना में इस साल बर्फबारी भी बेहद कम हुई है। इसके चलते जल स्रोतों में पानी का स्तर घटने लगा है। मौसम में आ रहे इस बदलाव का कारण वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी माना जा रहा है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बारिश पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता पर निर्भर रहती है। वर्ष भर में होने वाली सौ प्रतिशत बारिश में से 80 प्रतिशत बारिश मानसून काल में जून से सितंबर तक होती है जबकि शेष 20 प्रतिशत बारिश अन्य महीनों में होती है। इस साल शीतकाल में हिमालयी क्षेत्र से सटे कुछ क्षेत्रों को छोड़कर प्रदेश में नवंबर से अब तक बारिश नहीं होने के कारण सूखे जैसे हालात बने हुए हैं।
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बारिश के साथ बर्फबारी भी हुई कम

शीतकाल में 102 मिमी बारिश को सामान्य माना जाता है जबकि इस साल महज 37.6 मिलीमीटर बारिश ही हुई है। यह सामान्य से 63 प्रतिशत कम है। यही स्थिति बर्फबारी की भी है। पिछले साल की तुलना में इस साल बेहद कम बर्फबारी हुई है।

हिमनगरी के नाम से विख्यात मुनस्यारी में वर्ष 2022 में एक फीट हिमपात हुआ था। इस साल केवल ऊंचाई वाले इलाकों में चार इंच बर्फ ही गिरी। बारिश नहीं होने से असिंचित क्षेत्र की खेती सूखने की कगार पर है। कम बारिश से स्रोतों में पानी कम होने लगा है। बर्फबारी कम होने से इस साल अस्थायी ग्लेशियर भी नहीं बने।

मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के बेहद कमजोर होने से इस साल शीतकाल में सामान्य से 63 प्रतिशत कम बारिश हुई है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिछले कुछ वर्षों में मौसम में कुछ भिन्नता देखने को मिली है। इसमें मानव जनित कारण भी शामिल हैं।
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