रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और इस वजह से ग्लेशियर झीलों का निर्माण भी हो रहा है। इसका असर नदियों पर भी पड़ रहा है। कोसी जलसंग्रहण क्षेत्र में ही कोसी की सहायक नदियों की लंबाई करीब 225 किलोमीटर थी, जो अब घटकर 41 किलोमीटर ही रह गई है।
वनाग्नि जैव विविधता को पहुंचा रही नुकसान
रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि जैव विविधता के लिहाज से प्रदेश बहुत भाग्यशाली है, लेकिन जंगल की आग इस जैव विविधता को खासा नुकसान पहुंचा रही हैै। यह भी पाया गया है कि अधिकतर आग मानव जनित हैं और चीड़ के जंगल इसके प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
बड़े बांधों पर सवाल
पंचेश्वर बांध के कारण ही 193 किस्म के पेड़ और औषधीय पौधें, 43 प्रकार के स्तनपायी, करीब 70 तरह की चिड़ियां, 47 तरह की तितलियां और 30 तरह की मछलियां प्रभावित होंगी। इसी तरह से टिहरी बांध का भी असर पड़ा है।
रिपोर्ट में तेज शहरीकरण और कचरे का व्यापक प्रबंध न होने पर भी चिंता जताई गई है। यह पाया गया है कि कुल उत्पन्न होने वाले कचरे में से करीब 40 प्रतिशत कचरा उठ ही नहीं पाता और शहरों में ही डंप होकर रह जाता है। कुल 17 प्रतिशत कचरा ही है, जिसको रिसाइकिल किया जा सकता है।
सभी विभागों को भेजी जाएगी यह रिपोर्ट
यह रिपोर्ट ही इसलिए तैयार की गई है कि प्रदेश की पर्यावरण की चुनौतियों को समझा जा सके और समाधान खोजा जा सके। पहली बार यह रिपोर्ट जारी की जा रही है। रिपोर्ट में मौसम में बदलाव, शहरीकरण, जैव विविधता, आपदा आदि पर फोकस किया गया है। बोर्ड इस रिपोर्ट को प्रदेश के विभिन्न विभागों को भेजेगा, जिससे विभाग पर्यावरण के आधार पर परियोजनाएं तैयार कर सकें।
- एसपी सुबुद्धि, सदस्य सचिव, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड