कुटी गांव में बादल फटने से तबाही मची
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बादल फटने का मतलब यह नहीं कि उस क्षेत्र में धमाके के साथ बादल फट जाए बल्कि अगर किसी क्षेत्र में एक घंटे में 100 मिमी या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड की जाए तो इस घटना को बादल फटना कहा जाता है। मौसम विभाग अब शुरुआती 30 मिनट की बारिश और राडार से बादलों की स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद बादल फटने की भविष्यवाणी आधे घंटे पहले तक कर सकता है।
जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी)की स्टेटस रिपोर्ट-4 और 2007 की रिपोर्ट में बारिश के समय और क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों की ओर इशारा किया गया है। बारिश की मात्रा में बदलाव नहीं हुआ, लेकिन अवधि घट गई है। इससे अतिवृष्टि की घटनाएं बढ़ी हैं। पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान बारिश के स्वभाव में बहुत ज्यादा बदलाव देखा गया है। कुछ क्षेत्रों में बहुत तेज और लगातार बारिश हो रही है।
- डॉ. एसपी सती, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान, उत्तराखंड वानिकी एवं उद्यानिकी विवि
पिछले कुछ वर्षों के दौरान पहाड़ में जिन इलाकों में अतिवृष्टि के कारण भूस्खलन एवं अन्य नुकसान हुआ है, वहां के आंकड़े मौसम के बदलते हुए ट्रेंड की गवाही दे रहे हैं। बारिश का क्षेत्रफल सिमट रहा है। इससे उस इलाके में होने वाली बारिश की मात्रा बढ़ जा रही है। लगातार कई दिन तक भारी बारिश से ज्यादा नुकसान हो रहा है।
- बिक्रम सिंह, निदेशक, मौसम केंद्र देहरादून