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उत्तराखंड: बदल रहा मौसम का मिजाज, अब जहां बादल गरज रहे हैं, वहीं बरस भी रहे हैं

Tue, 24 Jul 2018 05:58 PM IST
अनिल चंदोला, अमर उजाला, देहरादून
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rain - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड में इन दिनों जो बादल गरजते हैं, बरसते नहीं, मुुहावरा बदल रहा है। बादल जहां गरज रहे हैं, वहीं जमकर बरस भी रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रदेश में बारिश के ट्रेंड में इस बदलाव की मौसम विशेषज्ञ पुष्टि करते हैं। वे कहते हैं कि एक ही इलाके में कई-कई दिन तक भारी बारिश हो रही है। विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह की बारिश समस्या बन रही है।

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मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, पहाड़ों पर आमतौर पर एक ही इलाके में लंबे समय तक भारी बारिश नहीं होती। मानसून सीजन में कई दिन हल्की और मध्यम बारिश होती है, यह बारिश एक बड़े इलाके में एकसमान रूप से होती है। स्थानीय भाषा में इसे झौड़ पड़ना भी कहते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस ट्रेंड में खासा बदलाव आया है। अब पहाड़ में ज्यादातर क्षेत्रों में गरज वाले बादल जमकर बरस भी रहे हैं। इसके चलते वहां भी कई-कई दिन तक लगातार भारी बारिश हो रही है। खास बात यह है कि इस तरह की बारिश एक बहुत छोटे इलाके में हो रही है।

इस दौरान उस क्षेत्र में कई जगह एक घंटे में 100-100 मिमी से अधिक की बारिश रिकॉर्ड की जाती है। जबकि उसके आसपास के ज्यादातर इलाकों में बहुत हल्की बारिश होती है या बिल्कुल भी नहीं। इससे उस क्षेत्र विशेष में नुकसान भी ज्यादा होता है। बड़े पैमाने पर भूस्खलन और टूटफूट की घटनाएं होती हैं। तेज बारिश से मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत को भी नुकसान पहुंचता है। मिट्टी बह जाती है, जिससे खेती में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं कि बारिश का पुराना ट्रेंड प्रकृति के लिए खासा फायदेमंद था। लगातार कई दिन तक होने वाली रिमझिम बारिश से पानी रिसकर जमीन के अंदर जाता था। इससे भूजल स्तर में सुधार के साथ जलस्त्रोत भी अच्छे से रिचार्ज होते थे। खेतों में नमी बढ़ती थी, जो खेती के लिए भी फायदेमंद होती थी। इससे भू-कटाव और भूस्खलन जैसे नुकसान भी कम होते थे।  
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बादल फटने का मतलब  

कुटी गांव में बादल फटने से तबाही मची - फोटो : file photo
बादल फटने का मतलब यह नहीं कि उस क्षेत्र में धमाके के साथ बादल फट जाए बल्कि अगर किसी क्षेत्र में एक घंटे में 100 मिमी या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड की जाए तो इस घटना को बादल फटना कहा जाता है। मौसम विभाग अब शुरुआती 30 मिनट की बारिश और राडार से बादलों की स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद बादल फटने की भविष्यवाणी आधे घंटे पहले तक कर सकता है।

जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी)की स्टेटस रिपोर्ट-4 और 2007 की रिपोर्ट में बारिश के समय और क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों की ओर इशारा किया गया है। बारिश की मात्रा में बदलाव नहीं हुआ, लेकिन अवधि घट गई है। इससे अतिवृष्टि की घटनाएं बढ़ी हैं। पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान बारिश के स्वभाव में बहुत ज्यादा बदलाव देखा गया है। कुछ क्षेत्रों में बहुत तेज और लगातार बारिश हो रही है।
- डॉ. एसपी सती, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान, उत्तराखंड वानिकी एवं उद्यानिकी विवि

पिछले कुछ वर्षों के दौरान पहाड़ में जिन इलाकों में अतिवृष्टि के कारण भूस्खलन एवं अन्य नुकसान हुआ है, वहां के आंकड़े मौसम के बदलते हुए ट्रेंड की गवाही दे रहे हैं। बारिश का क्षेत्रफल सिमट रहा है। इससे उस इलाके में होने वाली बारिश की मात्रा बढ़ जा रही है। लगातार कई दिन तक भारी बारिश से ज्यादा नुकसान हो रहा है।
- बिक्रम सिंह, निदेशक, मौसम केंद्र देहरादून
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