बेमौसम बारिश के कारण जिले में बागवानी किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ज्यादातर बागवानी की फसलों पर फूल आते ही बारिश ने कहर बरपा दिया है। उद्यान विभाग के अनुसार यह बारिश इन फसलों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। इससे जिले में इस बार आम, आड़ू, खुबानी, पुलम (आलू बुखारा) आदि फसलों के उत्पादन में भी गिरावट की आशंका है।
जिला उद्यान अधिकारी मीनाक्षी जोशी ने बताया कि बारिश के कारण हो रहे नुकसान का अभी आंकलन नहीं कराया गया है। बारिश के बाद ही नुकसान का आंकलन कराया जा सकता है, लेकिन वर्तमान में फील्ड कर्मचारियों की प्राथमिक रिपोर्ट है कि इससे उद्यानी फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में आड़ू, खुबानी जैसी फसलों पर आया बोर (फूल) काफी हद तक नष्ट हो चुके हैं। इसके अलावा निचले इलाकों में आम पर भी बोर आना शुरू हो गया है। इस बीच इस बारिश और ओलावृष्टि से बागानों में बोर नष्ट हो गया है।
इधर, बारिश से सामान्य फसलों मसलन गेहूं, सरसों आदि को खतरे की बात सामने नहीं आई है। मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी ने बताया कि गेहूं की फसल जवान हो चुकी है। इसके पकने में देरी हो सकती है, लेकिन फिलहाल इस बारिश से नुकसान की आशंका नहीं है। हालांकि, फील्ड कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे किसानों के संपर्क में रहें, ताकि किसी भी स्थिति का तात्कालिक जायजा लिया जा सके।
जिले में बागवानी फसलों की स्थिति
आम- 6337 हेक्टेयर
पुलम (आलू बुखारा)- 990 हेक्टेयर
आड़ू - 505 हेक्टेयर
खुबानी- 1158 हेक्टेयर
हरिद्वार में बेमौसमी बारिश के साथ ओलावृष्टि से जनपद हरिद्वार की 1.17 लाख हेक्टेयर भूमि में खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा करीब 18 हजार हेक्टेयर बागवानी के बौर झड़ गए हैं। फसलों में करीब 44 हजार हेक्टेयर गेहूं की फसल तो अधिकांश तौर पर खराब हो चुकी है, जबकि 25 फरवरी को हुई ओलावृष्टि से करीब 800 हेक्टेयर भूमि में खड़ी फसलें खराब हो गई थी। किसानों को पिछले नुकसान का मुआवजा तक नहीं मिला। अब फिर से आसमान से आफत बनकर बरसी बारिश और ओलों ने बड़ा नुकसान किया है।
किसान 25 फरवरी की रात को ओलावृष्टि के नुकसान से उबरे ही नहीं थे कि बृहस्पतिवार की रात 10 बजे से शुक्रवार की सुबह 10 बजे तक तेज बारिश के साथ चार बार ओलावृष्टि हो गई। इससे किसानों की फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है। इस समय गेहूं की फसल में बाल पूरी तरह से बन गई थी, लेकिन बारिश, हवा और ओलावृष्टि से गेहूं जमीन पर गिर गई। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. वीकेश की मानें तो जनपद में 44 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल खड़ी है। इसी के साथ अन्य दाल दलहन की फसलें भी तैयार हो चुकी थीं, उनमें भी नुकसान हुआ।
इसी के साथ करीब 1200 हेक्टेयर में बोई गई सरसों और मटर में अधिक नुकसान हुआ है। मसूर की फसल तो बुरी तरह से खराब हो गई। ग्राम अंबूवाला के किसान धर्मेंद्र प्रधान, अर्जुन चौहान, देवेंद्र सिंह, धर्म सिंह, सुखदेव सिंह, जनरैल सिंह, गुरप्रीत सिंह व बग्गा सिंह आदि ने बताया कि गेहूं व सरसों के साथ बागवानी में बड़ा नुकसान हुआ है। प्याज, आलू, गोभी व टमाटर के साथ अन्य सब्जियों की फसलों को ओले और ज्यादा पानी भरने से नुकसान हुआ है। वहीं, किसानों के सामने चारे का भी संकट खड़ा हो गया है।
15 दिन के अंतराल पर दो बार ओलावृष्टि होने से गन्ने की फसल का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे बड़ा नुकसान गन्ने की आंखें खराब होने से हुआ है। इससे जनपद का गन्ना बुआई लायक नहीं रह गया है। धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि होली पर गन्ने की बुआई शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार लगातार बारिश होने से एक महीने की देरी से गन्ना बुआई होगी। सबसे बड़ी बात तो यह है कि अब गन्ने का बीज कहां से लाएंगे। गन्ना समिति भी जनपद के एक दूसरे क्षेत्र से ही गन्ना उपलब्ध कराते थे।
औसत उपज के आधार पर मुआवजा मिले : अंबरीष
यूनियन भवन पर किसानों के साथ बैठक करते हुए पूर्व विधायक अंबरीष कुमार ने फसलों के नुकसान के बदले में न्यूनतम समर्थन मूल्य और औसत उपज के आधार पर मुआवजा दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों ने सहकारी संस्थाओं से कर्ज लेकर फसलें तैयार की थीं। वह मेहनत मिट्टी में मिल गई है। अधिकारी निरीक्षण करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुआवजा नहीं मिला तो सरकार के विरुद्ध आंदोलन होगा। इस मौके पर मास्टर जगपाल, जगपाल सिंह, कुंवर पाल, अजमोद मोदी, जसवंत चौहान, नंदलाल राणा, क्षेत्रपाल चौहान, इसम सिंह बच्चन, साजिद, इकबाल, धनश्याम, सुखबीर, सलीम, रवि, वकील व इसरार आदि शामिल हुए।