झंडा जी को स्थापित करना बेहद मुश्किल रहा, लेकिन श्री झंडा जी की दिव्य शक्ति और श्रद्धालुओं की श्री झंडा जी के प्रति अटूट आस्था का ही नतीजा रहा कि पूरी प्रक्रिया सकुशल संपन्न हुई। आरोहण के समय श्रद्धालु महाराज के जयकारे लगाते रहे। वहीं, ढोल-नगाडों की थाप की मधुर ध्वनि श्रद्धालुओं में ऊर्जा का संचार करती रही।
दर्शनी गिलाफ को छूने को आतुर रहे श्रद्धालु
झंडा जी के आरोहण में दर्शनी गिलाफ का विशेष महत्व होता है। दर्शनी गिलाफ चढ़ाने के लिए 100 साल पहले ही बुकिंग करानी होती है, तब जाकर किस्मत वाले को ही यह सौभाग्य हासिल हो पाता है। इस दर्शनी गिलाफ को श्री झंडा जी पर चढ़ाए जाने से पहले उसे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया। दर्शनी गिलाफ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रही। दर्शनी गिलाफ को छूकर श्रद्धालु धन्य हुए।
मखमली वस्त्र, सुनहरे गोटों, चंवर से सुसज्जित कर श्री झंडे जी का आरोहण किया गया। श्री झंडे जी को लकड़ियों की कैंची के सहारे धीरे-धीरे खड़ा किया गया। श्री झंडा साहिब को स्थापित किया तो श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनकर खुद को सौभाग्यशाली समझा। इस दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम नजर आई।
श्री गुरू राम राय का 374वां जन्मदिवस मनाया
श्री गुरू राम राय ने वर्ष 1676 में दून में डेरा डाला था। उनका जन्म 1646 में पंजाब के होशियारपुर जिले के कीरतपुरमें होली के पांचवें दिन हुआ था। इसलिए दरबार साहिब में हर साल होली के पांचवें दिन उनके जन्मदिवस पर झंडा मेला लगाया जाता है। गुरू राम राय ने ही लोक कल्याण के लिए विशाल ध्वज को यहां स्थापित किया था। इस बार उनका 374वां जन्मदिवस धूमधाम से मनाया गया।