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उत्तराखंड मौसम अपडेटः  देर शाम हुई बर्फबारी, बदरीनाथ में सात और औली में चार इंच ताजी बर्फ जमी

Mon, 08 Mar 2021 11:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। रविवार को राजधानी दून व आसपास के इलाकों में न सिर्फ बादल छाए रहे, वरन कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी हुई। वहीं रविवार देर रात तेज आंधी के साथ बारिश भी हुई। बारिश सोमवार सुबह तक रुक-रुक कर जारी रही।
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बर्फबारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दो दिनों तक बदरीनाथ धाम सहित अन्य ऊंची चोटियों पर जमकर बर्फबारी हुई, जिससे ठंड फिर से बढ़ गई है। जबकि केदारनाथ में हल्की बर्फबारी हुई।  चमोली जिले में रविवार रात को ही मौसम बदलने के साथ तेज हवा चली और बारिश के साथ बर्फबारी होने लगी। सोमवार सुबह करीब दस बजे तक बारिश और बर्फबारी होती रही, जिससे बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, औली, चिनाप वैली, कुवारी पास, गोरसो, जोशीमठ की चोटी स्लीपिंग लेडी सहित अन्य ऊंचाई वाले इलाके बर्फ से ढक गए। बदरीनाथ में सात इंच और औली में चार इंच ताजी बर्फ जमी। जबकि हेमकुंड साहिब में करीब एक फीट बर्फ जमी है।

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यहां पहले से चार फीट बर्फ जमी हुई है। वहीं केदारनाथ, द्वितीय केदार मद्महेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ समेत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हुई। वहीं जिला मुख्यालय समेत घाटी क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई। केदारनाथ धाम में दिन में दो घंटे तक रुक-रुककर हल्की बर्फबारी हुई।

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घाटियों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में हुई बर्फबारी
उत्तरकाशी में रविवार पूरी रात जिले की निचली घाटियों में रिमझिम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का सिलसिला जारी रहा। एक बार फिर यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम समेत जिले में समुद्र सतह से तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। 

सोमवार सुबह तक जिले की निचली घाटियों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में जमकर बर्फबारी हुई। जिले में यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम समेत समुद्र सतह से तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाके एक बार फिर बर्फ से ढक गए हैं। धामों में करीब एक फीट बर्फ जमा हो गई है। सोमवार को जिला मुख्यालय समेत निचली घाटियों में अधिकतम तापमान 18 डिग्री और न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम में अधिकतम 5 डिग्री और न्यूनतम माइनस 6 डिग्री रहा।

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मौसम के बदले मिजाज के चलते बीमारियों का खतरा 

दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. केसी पंत के अनुसार मौसम के अचानक बदलने से तापमान में जिस तरीके से तेजी से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इससे सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, जैसी सामान्य बीमारियों के साथ ही दमा समेत अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।
 
थोड़ी सी भी बारिश में यदि कोई भीग गया तो उसका बिस्तर पकड़ना तय है। कहा कि बदलते मौसम में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कम हो जाती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि बीमारियों से बचना है तो पर्याप्त कपड़े पहनने के बाद ही घर से बाहर निकले।
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मुनस्यारी के ऊंचाई वाले इलाकों में दो फुट बर्फबारी

मुनस्यारी के ऊंचाई वाले इलाकों में रविवार रात जमकर हिमपात हुआ। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय सहित जिले के विभिन्न हिस्सों में तेज गरज और चमक के साथ बारिश हुई। उच्च हिमालयी क्षेत्रों के साथ निचले इलाकों में हुई बर्फबारी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मल्ला जोहार के लास्पा और मिलम में दो फुट से अधिक बर्फबारी हुई है। खलिया और भुजानी में कई पर्यटक भी बर्फबारी का आनंद उठा रहे हैं। 

उच्च हिमालयी क्षेत्र मिलम, लास्पा, दारमा, व्यास और चौदास वैली में दो फुट तक हिमपात हुआ है। लास्पा में दो फुट बर्फबारी होने से बीआरओ को मुनस्यारी-मिलम सड़क बनाने में दिक्कत हो रही है। मुनस्यारी के खलिया भुजानी में भी दो फुट बर्फबारी हुई है, जिसका कई पर्यटक जमकर आनंद उठा रहे हैं। धारचूला के व्यास और दारमा घाटी में भी हिमपात हुआ। निचले इलाकों में हल्की बारिश हुई। हालांकि बर्फबारी से मुनस्यारी को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में शीतलहर जैसा कोई असर नहीं देखा गया। वहीं धारचूला में तड़के चार बजे से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इस कारण बिजली की आंखमिचौली भी जारी है।

बारिश से खिल उठे किसानों के चेहरे
सर्दी में सामान्य से भी कम बारिश होने से परेशान किसानों के चेहरे पर रविवार की बारिश कुछ खुशी लेकर आई। किसानों का कहना है कि रुक-रुक कर बारिश होती रहे तो फसलों में कुछ सुधार की उम्मीद है। किसान संगठन के अध्यक्ष सुभाष जोशी का कहना है कि अधिकतर फसलें सूखे के कारण पहले ही प्रभावित हो गई हैं। खेतों में बीज अंकुरित ही नहीं हो पाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को किसानों को मुआवजा देना चाहिए। हल्की बारिश से जंगल की आग और धूल से भी राहत मिली है। 
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