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उत्तराखंड मौसम अपडेट : प्रदेश के कई जिलों में आज भी भारी बारिश की चेतावनी

Sun, 20 Jun 2021 03:42 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

शनिवार को प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। इससे ज्यादातर नदियां उफान पर हैं। राज्य के तमाम पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश का क्रम बना हुआ है।
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कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के कई जिलों में रविवार को भी भारी बारिश हो सकती है। मौसम केंद्र ने इन जिलों में कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। कुछ अन्य इलाकों में गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने और तेज बौछारें पड़ने का भी अनुमान है। उत्तराखंड के अधिकतर इलाकों में रविवार तीसरे दिन भी रुक-रुक कर बारिश जारी जारी रही। वहीं दोपहर बाद देहरादून सहित कई इलाकों में मौसम साफ हो गया।

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शनिवार को प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। इससे ज्यादातर नदियां उफान पर हैं। राज्य के तमाम पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश का क्रम बना हुआ है। मौसम केंद्र की ओर से जारी बुलेटिन में रविवार को भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। बुलेटिन के अनुसार पिथौरागढ़, नैनीताल, चंपावत, देहरादून, पौड़ी, टिहरी जिलों में कई जगह भारी बारिश हो सकती है।
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इससे तापमान में भी गिरावट आने के आसार हैं। दूसरी ओर राजधानी दून में भी बादल छाये रहने का अनुमान है। दिन में दो से तीन दौर की बारिश हो सकती है। इससे दून के तापमान में करीब सात डिग्री तक की कमी आने के आसार हैं। लोगों को दिन में होने वाली गर्मी और उमस से कुछ राहत मिल सकती है।

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सामान्य से 10 डिग्री नीचे पहुंचा राजधानी दून का पारा

राजधानी दून में पिछले दो-तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश का असर तापमान पर भी पड़ा है। दून में अधिकतम तापमान सामान्य से 10 डिग्री तक नीचे गिर गया है। इससे लोगों को गर्मी और उमस से कुछ राहत मिली है। हालांकि रात को मौसम सामान्य बना हुआ है। मौसम विभाग ने रविवार को भी ज्यादातर क्षेत्रों में बारिश होने का अनुमान जताया है। 

राजधानी और आसपास के इलाकों में शनिवार तड़के से तेज बारिश जारी रही। ज्यादातर क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ीं। सुबह बारिश में भी कमी आई, लेकिन ज्यादातर क्षेत्रों में रुक-रुककर हल्की बारिश होती रही।

मौसम केंद्र के अनुसार राजधानी दून में पिछले 24 घंटों के दौरान करीब 34 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। दिन में बादल छाये रहने और बारिश के चलते तापमान में कमी आई। 

नदी तटों से लोगों को हटाया

लगातार बारिश के बाद रिस्पना और बिंदाल नदियों में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने शनिवार को तटवर्ती क्षेत्रों से लोगों को हटाया।

इसके अलावा कई क्षेत्रों में मुनादी कर लोगों से इलाके को खाली करने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई। नदी के ज्यादा नजदीक रह रहे कुछ लोगों ने घर खाली भी कर दिए। हालांकि कुछ देर बाद बारिश बंद हो गई, जिससे प्रशासन और लोगों ने राहत की सांस ली। 

कई स्थानों पर जलभराव से परेशान हुए लोग
राजधानी दून और आसपास के इलाकों में जलभराव होने से लोगों को खासा परेशान होना पड़ा। सुबह के समय तेज बारिश के चलते कई जगह सड़कों पर भी पानी भर गया। इस दौरान राजपुर रोड, धर्मपुर, हरिद्वार रोड, सहारनपुर रोड समेत कई क्षेत्रों की सड़क में पानी भरा रहा।

वहीं, चुक्खू मोहल्ला, खुड़बुड़ा, मोती बाजार, सुमननगर, मेहूंवाला, बंजारावाला समेत कई मोहल्लों में भी जलभराव के कारण लोगों को परेशान होना पड़ा। बारिश बंद होने के चलते लोगों को कुछ राहत मिली।
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मॉक ड्रिल : बाढ़ की सूचना मिलने के कई घंटे बाद पहुंचीं गाड़ियां 

रिस्पना नदी में बाढ़ की सूचना के बाद तमाम एजेंसियों व विभागों ने बचाव अभियान शुरू किया। इस दौरान लोगों को सुरक्षित शिफ्ट करने के लिए मंगाई गई गाड़ियां कई घंटे बाद पहुंचीं। सिंचाई विभाग की जेसीबी और मजदूर बचाव कार्य लगभग समाप्त होने पर पहुंचे। इसको लेकर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और उन्हें रिस्पांस टाइम सुधारने के निर्देश दिए। 

राजधानी के आपदा प्रबंधन विभाग ने शनिवार को दो अलग-अलग स्थानों पर मॉक ड्रिल की। इसके तहत रिस्पना नदी में पानी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति पैदा होने और करीब दो सौ लोगों के फंसे होने की सूचना फ्लैश की गई। साथ ही कालसी-साहिया-चकराता रूट पर जजरेट में बादल फटने, सड़क की कनेक्टिविटी टूटने और कुछ वाहनों के फंसे होने की जानकारी दी गई।

आपदा कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही डीएम डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव, सेना के कर्नल एस शंकर, एसएसपी योगेंद्र रावत, सीडीओ नितिका खंडेलवाल और एडीएम प्रशासन वीर सिंह बुदियाल मौके पर पहुंचे। एडीएम एफआर गिरीश चंद्र गुणवंत और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डॉ. दीपशिखा रावत वहां पहले से तैनात थे।

डीएम के निर्देश पर एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, पुलिस, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और चूना भट्टा में फंसे लोगों को रेस्क्यू करने के लिए अभियान चलाया। टीमों ने वहां से 200 लोगों को रेस्क्यू किया और चूना भट्टा स्थित रैन बसेरे में शिफ्ट किया।

किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सहस्त्रधारा हेलीपेड पर हेलीकॉप्टर तैयार रखने को कहा गया। बाद में ड्रिल की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि कुछ विभागों ने तेजी से रिस्पांस नहीं दिया। रेस्क्यू दल को सहायता देने वाले सपोर्टिंग सिस्टम में सुधार की जरूरत है। कर्नल एस शंकर ने कहा कि आपदा की स्थिति में शुरूआती एक घंटे में पहुंचना आवश्यक होता है।
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