मुख्यमंत्री ने जावड़ेकर से वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर को वानिकी गतिविधियों के रूप में परिभाषित करने का अनुरोध किया। बता दें कि वानिकी गतिविधि में शामिल होने पर राज्य सरकार कैंपा योजना से वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर बना सकती है।
मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव के पक्ष में कहा कि उत्तराखंड में जंगली जानवर विशेष तौर पर बंदर, सूअर और मैदानी क्षेत्रों में नील गाय खेती को नुकसान पहुंचाते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों पर लैपर्ड द्वारा हमले की घटनाओं को रोकने और जंगली जानवरों द्वारा खेती को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने इस पर भी अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति दी।