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उत्तराखंड: कोरोना जांच से बचने को वार्ड आया से घर पर कराया महिला का प्रसव, मां और बच्चे दोनों की मौत

Fri, 07 Aug 2020 09:35 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)

सार

  • संयुक्त चिकित्सालय की आउटसोर्स कर्मी बताई गई है प्रसव कराने वाली वार्ड आया 
  • अस्पताल में प्रसव से पूर्व कोरोना जांच के झंझट से बचने को घर पर कराया था प्रसव 
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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उत्तराखंड के चंपावत में वार्ड आया से घर पर प्रसव कराने के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। मामला शहर के वार्ड तीन के अंबेडकर नगर कॉलोनी का है। प्रसव कराने वाली आया संयुक्त चिकित्सालय की आउटसोर्स कर्मचारी बताईजा रही है। मृतका के पति ने हालांकि अभी कहीं शिकायत नहीं की है, लेकिन नवजात के साथ पत्नी की मौत से पति सदमे में है।

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इधर एसीएमओ का कहना है कि मामला न तो सरकारी अस्पताल से जुड़ा है और न अब तक किसी ने शिकायत की है। शिकायत मिली तो जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने से पहले कोरोना जांच के झंझट से बचने के लिए उन्होंने घर में ही प्रसव कराया था। 


आंबेडकर नगर निवासी विनोद विश्वकर्मा की 28 वर्षीय गर्भवती पत्नी सीता को बृहस्पतिवार की दोपहर करीब एक बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इस पर पति ने पहले से संपर्क में रही संयुक्त चिकित्सालय की एक आउटसोर्स आया को फोन किया तो वह प्रसव कराने घर आ गईं। बताया गया कि करीब दो घंटे बाद महिला ने नवजात शिशु को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ ही देर बाद ही शिशु की मौत हो गई।

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...तो क्या वार्ड आया कर रही महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़  

इसके बाद प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी तो उसे आया की सलाह पर आनन-फानन में निजी वाहन से खटीमा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतका के पति विनोद के मुताबिक नवजात की मौत का पता चलने पर उसकी पत्नी सीता को सदमा लगा और सदमे से ही उसकी मौत हुई है।  

वार्ड आया के घर जाकर प्रसव कराने में नवजात और प्रसूता की मौत की घटना से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वार्ड आया पैसे के लालच में नियम और कानून ताख पर रखकर गर्भवती महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है।

एक ओर सरकारी अस्पतालों में महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए सरकार मोटा बजट खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे लोग भी सक्रिय हैं जो थोड़े बहुत पैसों के लिए गरीबों को झांसे में लेकर उनकी जिंदगी से खेल रहे हैं।

टनकपुर में गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं

टनकपुर में हुई जच्चा और बच्चा की मौत जिले की लचर स्वास्थ्य सेवा की बानगी भर है। वैसे जिले की 2,59,648 की आबादी में 49.39 प्रतिशत (128253) महिलाएं हैं। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद महिलाओं की सेहत पर किसी का ध्यान नहीं है। सियासत से लेकर अफसर तक सेहत को संवारने के अनेकों बार दावे कर चुके हैं, लेकिन सामान्य इलाज तक मुहैय्या हो पाना यहां किसी चमत्कार से कम नहीं है। यहां पर वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनाकोलॉजिस्ट) और एलएमओ तक की तैनाती नहीं है। और तो और टनकपुर में तो अल्ट्रासाउंड तक की पिछले तीन साल से सुविधा नहीं है। 

चंपावत जिले के तमाम अस्पतालों में आने वाली औसतन प्रति माह 11305 ओपीडी में से 3735 महिलाओं से संबंधित मामले आते हैं। लेकिन महिलाओं के इलाज की कोई कारगर व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल को छोड़कर जिले के अन्य छोटे-बड़े 22 सरकारी अस्पतालों में इलाज का टोटा है। टनकपुर में तो रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड तक की व्यवस्था नहीं है।
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चंपावत जिले में 2018 से अब तक की स्थिति

इसके चलते गर्भवती महिलाओं के इलाज से लेकर जटिल प्रसव में दुश्वारी आती है। और तो और 2018 से अब तक 18 गर्भवती महिलाओं व प्रसूताओं तथा 102 नवजात शिशुओं की मौत भी हो चुकी है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि टनकपुर में रेडियोलॉजिस्ट सहित अन्य रिक्त पदों को भरने के प्रयास किए जा रहे हैं।

वर्ष        प्रसव      गर्भवती की मौत  शिशुओं की मौत
2018    2370          07                      45
2019    2398          08                       50
2020    1075          03                      03  अब तक
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