इसके बाद प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी तो उसे आया की सलाह पर आनन-फानन में निजी वाहन से खटीमा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतका के पति विनोद के मुताबिक नवजात की मौत का पता चलने पर उसकी पत्नी सीता को सदमा लगा और सदमे से ही उसकी मौत हुई है।
वार्ड आया के घर जाकर प्रसव कराने में नवजात और प्रसूता की मौत की घटना से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वार्ड आया पैसे के लालच में नियम और कानून ताख पर रखकर गर्भवती महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है।
एक ओर सरकारी अस्पतालों में महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए सरकार मोटा बजट खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे लोग भी सक्रिय हैं जो थोड़े बहुत पैसों के लिए गरीबों को झांसे में लेकर उनकी जिंदगी से खेल रहे हैं।
टनकपुर में हुई जच्चा और बच्चा की मौत जिले की लचर स्वास्थ्य सेवा की बानगी भर है। वैसे जिले की 2,59,648 की आबादी में 49.39 प्रतिशत (128253) महिलाएं हैं। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद महिलाओं की सेहत पर किसी का ध्यान नहीं है। सियासत से लेकर अफसर तक सेहत को संवारने के अनेकों बार दावे कर चुके हैं, लेकिन सामान्य इलाज तक मुहैय्या हो पाना यहां किसी चमत्कार से कम नहीं है। यहां पर वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनाकोलॉजिस्ट) और एलएमओ तक की तैनाती नहीं है। और तो और टनकपुर में तो अल्ट्रासाउंड तक की पिछले तीन साल से सुविधा नहीं है।
चंपावत जिले के तमाम अस्पतालों में आने वाली औसतन प्रति माह 11305 ओपीडी में से 3735 महिलाओं से संबंधित मामले आते हैं। लेकिन महिलाओं के इलाज की कोई कारगर व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल को छोड़कर जिले के अन्य छोटे-बड़े 22 सरकारी अस्पतालों में इलाज का टोटा है। टनकपुर में तो रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड तक की व्यवस्था नहीं है।
इसके चलते गर्भवती महिलाओं के इलाज से लेकर जटिल प्रसव में दुश्वारी आती है। और तो और 2018 से अब तक 18 गर्भवती महिलाओं व प्रसूताओं तथा 102 नवजात शिशुओं की मौत भी हो चुकी है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि टनकपुर में रेडियोलॉजिस्ट सहित अन्य रिक्त पदों को भरने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्ष प्रसव गर्भवती की मौत शिशुओं की मौत
2018 2370 07 45
2019 2398 08 50
2020 1075 03 03 अब तक