देहरादून और तीर्थनगरी ऋषिकेश को रेल सेवा से जोड़ने की योजना अंग्रेजों के दौर में ही तैयार हो गई थी।
मगर आजादी 68 साल बाद भी योजना पटरी पर नहीं उतर पाई। हर बजट से पहले कांग्रेस और भाजपा के स्थानीय नेता ऋषिकेश-दून रेल लाइन का मसला जोर शोर से उठाते रहे, लेकिन लगातार उम्मीद बिखरने के कारण दो साल से चुप्पी साध ली है।
ब्रिटिश काल में देहरादून तक रेल लाइन पहुंचाने के बाद अंग्रेजी हुकूमत दून और ऋषिकेश को सीधी रेल सेवा से जोड़ने की योजना बनाई थी। सूत्रों के मुताबिक तब अंग्रेजों ने लाइन के लिए सर्वे भी कर लिया था। अंग्रेजों के जाने के बाद रेल लाइन महज सर्वे तक पर ही खड़ी रह गई।
राजधानी बनने के बाद बुलंद हुई थी आवाज
राज्य गठन के बाद दून राजधानी बनी तो इस मांग ने और जोर पकड़ा। तीर्थनगरी और आस-पास के व्यापारियों और निवासियों ने भी इसका जोर-शोर से समर्थन किया था। कुछ साल पहले उम्मीद भी थी कि बजट में लाइन के लिए घोषणा होगी, लेकिन अब तक मायूसी ही हाथ लगी।
बेरोजगारों को मिलेगा फायदा
ऋषिकेश से रोजाना औसतन दस हजार से अधिक कामकाजी देहरादून, सेलाकुई और आसपास के क्षेत्रों में आते हैं। बस से देहरादून आने में करीब डेढ़ घंटे लगता है। रेल सेवा शुरू होने से समय भी कम लगेगा और ज्यादा से ज्यादा लोग रोजगार से जुड़ सकेंगे।