उत्तराखंड के करीब 33 हजार बेरोजगारों को प्रदेश सरकार वादे के मुताबिक न तो रोजगार उपलब्ध करा पाई और न ही पिछले एक साल से उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है। इससे नाराज बेरोजगार कई बार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी कर चुके हैं लेकिन हुआ कुछ नहीं। इस बारे में सेवा योजना विभाग का कहना है कि उन्हें बजट ही नहीं मिला तो भत्ता कहां से दें। हालांकि विभाग ने बेरोजगारी भत्ता देने के लिए सरकार को दोबारा 55 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है।
प्रदेश में बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए खोले गए सेवायोजन कार्यालय भी अपनी सार्थकता साबित करने में नाकाम हैं। देहरादून जनपद के सेवायोजन कार्यालय के आंकड़े इस बात को साबित भी करते हैं। देहरादून जनपद में बीते ढाई वर्ष में मात्र 27 बेरोजगारों को सेवायोजन विभाग प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलवा पाया है। सेवायोजन कार्यालय में लगने वाले रोजगार मेलों की रफ्तार भी बेहद धीमी है।
यही वजह है कि रोजगार कार्यालय में बेरोजगारों के पंजीकरण की संख्या में कमी आई है। उधर बेरोजगार बेरोजगारी भत्ते की मांग को लेकर समय-समय पर प्रदर्शन करते रहते हैं। इसके बावजूद सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ा। जबकि वर्ष 2011 में कांग्रेस सरकार ने चुनावी समर में बेरोजगारों को भत्ता देने की घोषणा की थी। पर आज यही सरकार बेरोजगारों से मुंह फेर रही है। वहीं सेवायोजन कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी आए दिन भत्ते के लिए आने वाले बेरोजगारों के आगे बजट की कमी का रोना रो रहे हैं।
इतने बेरोजगारों को भत्ता
उत्तराखंड में 9.49 लाख बेरोजगारों ने सेवायोजन कार्यालयों में पंजीकरण कराया है। जिनमें से विभाग करीब 33 हजार बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता दे रहा था। शेष पंजीकृत बेरोजगारों का सत्यापन व अन्य कार्यवाही जारी है। विभाग 11वीं पास को 750, स्नातक को 1000 व स्नाकोत्तर को 1500 रुपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देता है।
कई बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है। बजट को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक हुई। लेकिन अभी तक बजट जारी नहीं हुआ है। बजट जारी होते ही बेरोजगारी भत्ता मिलना शुरू हो जाएगा।
- सुभाष कुमार, प्रभारी उपनिदेशक सेवायोजन
Published By : Nirmala Suyal