उत्तराखंड की जमीं पर खड़े वृक्षों ने करोड़ों टन कार्बन अवशोषित कर लिया है। जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार ये कार्बन सोखने के बदले उत्तराखंड को धन मिलने की संभावना है। वन विभाग और भारतीय वानिकी अनुसंधान परिषद ने संयुक्त रूप से नैनीताल जिले के पहाड़पानी क्षेत्र के हजारों हेक्टेयर के वनों में कितना कार्बन जमा है, उसका अध्ययन पूरा कर लिया है।
कुछ औपचारिकताओं को पूरा कर हमारे जंगल में जमा कार्बन को विकसित देशों को बेचकर (कार्बन उत्सर्जन करने वाले) राज्य फंड प्राप्त कर सकेगा। इस राशि का इस्तेमाल वन पंचायतों के माध्यम से वन संरक्षण और दूसरे कामों में किया जा सकेगा। एक अनुमान है कि कार्बन बेचकर करीब 54 करोड़ तक आय हो सकती है।
हरियाली संरक्षण में प्रदेश की अहम भूमिका रही है। इसकी कीमत भी यहां के लोगों ने चुकाई है। ऐसे में लंबे समय से ग्रीन बोनस की मांग होती रही है। कुछ इसी तरह पेड़ों में कार्बन सोखने के बदले फंड लेने की दिशा में कदम बढ़ गया है। वन विभाग और फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ने 2014 में कार्बन ट्रेडिंग के तहत नैनीताल जिले के पहाड़पानी क्षेत्र में रिड्यूशिंग एमीशन फ्रॉम डिफारेस्ट्रेशन एंड फारेस्ट्र डिग्रेडेशन (आरईडीडी प्लस योजना के तहत) अध्ययन शुरू किया था। इसका उद्देश्य पेड़ों में कितना कार्बन जमा है, उसका आंकलन करना था।
इस प्रोजेक्ट से जुड़े आईसीएफआरई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. वीआरएस रावत के अनुसार 40 हजार हेक्टेयर के मिश्रित जंगल को 128 सैंपल का प्लाट बनाकर अध्ययन किया गया। इसमें कितना कार्बन जमा है, यह पता कर लिया गया है। अब इस कार्बन को वॉलेंटरी कार्बन मार्केट के जरिये विकसित देशों को को बेचा जाएगा। ये वह देश है, जो कार्बन उत्सर्जन करते हैं और उसके बदले कार्बन स्टॉक करने के लिए ग्रीन कवर बढ़ाने, वनों का संरक्षण वाले देशों की आर्थिक मदद करते हैं। वन संरक्षक डा. धकाते के अनुसार कार्बन का मार्केट भी स्टॉक एक्सचेंज की तरह ऊपर-नीचे होता रहता है। एक प्रारंभिक अनुमान है कि अगर रेट सही मिले तो इस कार्बन के बदले 54 करोड़ तक मिल सकते हैं।
वन पंचायतों की दुनिया में तारीफ
देहरादून। प्रदेश में करीब 13 हजार वन पंचायतें हैं। इन वन पंचायतों का वनों के संरक्षण में अहम भूमिका रही है। पेरिस सम्मेलन में राज्य के वन पंचायतों की भूमिका को वन विभाग के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय फोरम पर रखा था। जंगल को बचाने में जनसमुदाय (वन पंचायतों) के इस फार्मूले की दुनिया में तारीफ हुई थी। कई देशों के प्रतिनिधियों ने हमारी वन पंचायतों को जानने में रुचि दिखाई थी। पेरिस कलाइमेंट चेंज एग्रीमेंट में भी कार्बन ट्रेडिंग का उल्लेख है।
यह एक बड़ी उपलब्धि है। इसके जरिये आगे और वन क्षेत्रों का अध्ययन करने कार्बन बेचने और आर्थिक मदद लेने का रास्ता खुल सकेगा। उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा, जिसने इतने बड़े स्तर पर वनों में कार्बन स्टॉक का अध्ययन किया है। भविष्य में कार्बन बेचकर जो राशि मिलेगी, उस पर स्थानीय लोगों का पूरा अधिकार होगा। राशि का इस्तेमाल वन पंचायतों के सुदृढ़ीकरण और संरक्षण से जुड़े कार्यों में किया जाएगा।
- डॉ. पराग मधुकर धकाते, आरईडीडी प्लस योजना के नोडल अधिकारी व वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त