परिवहन निगम की ओर से टाटा कंपनी से खरीदी गई बसों में खामियां उजागर होने के बाद अब परिवहन निगम प्रबंधन हर कदम सोच समझकर उठा रहा है। परिवहन निगम प्रबंधन ने फैसला लिया है कि अब टाटा व अशोक लीलैंड कंपनी से खरीदी जाने वाली बसों का पहले 15 दिन ट्रायल किया जाएगा।
ट्रायल में पास होने के बाद ही बसों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। परिवहन निगम के तकनीकी विशेषज्ञों व चालकों की टीम बसों का 15 दिन तक ट्रायल करेगी। ट्रायल मेें पास होने के बाद ही बाकी बसों की आपूर्ति की जाएगी।
परिवहन निगम प्रबंधन ने टाटा व अशोक लीलैंड कंपनी से 300 बसें खरीदी हैं। जिसमें 150 टाटा कंपनी व 150 अशोक लीलैंड कंपनी से खरीदी है। टाटा कंपनी ने तो अपनी बसों की आपूर्ति कर दी। बसों का पंजीकरण कराने के साथ ही उन्हें सड़कों पर भी उतार दिया गया लेकिन बसें उस समय विवाद के घेरे में आ गई, जब चलती बसों के गियर लीवर टूटने लगे।
प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने बसों के संचालन व कंपनी के तमाम भुगतानों पर रोक लगा दी। उन्होंने प्रकरण को गंभीरता से लेते सीआईआरटी के विशेषज्ञों से तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया।
सीआईआरटी विशेषज्ञों ने बसों की जांच की और गियर लीवर में खामियों के साथ ही 16 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। विशेषज्ञों ने कहा कि गियर लीवर में बदलाव किए जाने की जरूरत है। सीआईआरटी विशेषज्ञों के रिपोर्ट के आधार पर ही प्रबंधन ने सभी बसों को टाटा कंपनी के पंतनगर प्लांट को लौटा दिया।
कंपनी ने इसमें बदलाव भी कर दिया लेकिन इस प्रकरण के बाद अब प्रबंधन ने फैसला किया है कि टाटा व अशोक लीलैंड कंपनी से बसों की आपूर्ति तब होगी जब इन कंपनियों द्वारा दी गई कुछ बसों का पहले 15 घंटा लिया जाएगा।
महाप्रबंधक दीपक जैन का कहना है कि दोनों कंपनियों से आपूर्ति की जाने वाली बसों का पहले तकनीकी विशेषज्ञों व चालकों द्वारा ट्रायल किया जाएगा। यदि बसें ट्रायल में पास होती हैं तो आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।