आईएमपी कंपनी से ट्रांसफार्मर खरीद पर सवाल उठाने वाले एक अफसर को तब इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा था। पिटकुल के तत्कालीन एमडी एसएस यादव ने ईई बीएस पांगती को सस्पेंड कर दिया था। हालांकि तब पांगती पर कुछ और आरोप लगाकर निलंबन का आधार बनाया गया था।
श्रीनगर गढ़वाल में तैनात पिटकुल के अधिशासी अभियंता (ईई) बीएस पांगती कोट्रांसफार्मर की गुणवत्ता जांचने के लिए नियुक्त किया गया था। ईई पांगती ने निरीक्षण में ट्रांसफार्मर निर्धारित मानकों और तकनीकी गुणवत्ता के रूप में निमभन स्तरीय पाए थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में भी ट्रांसफार्मरों की गुणवत्ता और मानकों पर सवाल उठाते हुए खरीद न करने का सुझाव दिया। जांच में यह पाया गया था कि रिकार्ड यह दर्शा रहे हैं कि एग्रीमेंट के बाद कंपनी ने कुछ ही दिन में ट्रांसफार्मर तैयार किए हैं। ईई की रिपोर्ट को किनारे फेंक पिटकुल ने फिर भी इसी कंपनी से ट्रांसफार्मरों की खरीद की। यही नहीं ईई पांगती को निलंबित भी कर दिया।
हालांकि पांगती पर निलंबन के लिए कुछ दूसरे आरोपों को आधार बनाया। लेकिन सूत्र इस पूरे प्रकरण को आईएमपी कंपनी से ट्रांसफार्मर खरीद पर सवाल उठाने के मामले से जोड़ते रहे हैं। तब पीएस पांगती ने भी स्वयं मीडिया में अपना पक्ष रखा था। पांगती ने बिना उनका पक्ष सुने एकतरफा कार्रवाई और मानसिक रूप से भी उत्पीड़न करने के भी आरोप लगाए थे। पिटकुल प्रबंधन ने सेवा नियमावली का डर दिखाकर तब उन्हें चुप रहने की सलाह दी थी। तब ऊर्जा निगमों के कर्मचारी संगठनों ने भी पिटकुल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। सूत्रों का कहना था कि ईई पांगती पर हुई कार्रवाई के बाद कोई भी अफसर इस प्रकरण में सवाल उठने से बच रहे थे। अब मामले की पर्तें खुलने पर यह चर्चा आम हो गई है कि क्या इस घपले में संलिप्त बड़े आकाओं पर भी कार्रवाई हो पाएगी? या फिर वे अपनी राजनीतिक पहुंच के बल पर कार्रवाई से बच जाएंगे।
ट्रांसफार्मर मिला नहीं बैंक गारंटी वापस कर दी
अफसरों ने ट्रांसफार्मर आपूर्ति कंपनी को बैंक गारंटी लौटाने में खूब दरियादिली दिखाई। पिटकुल में ट्रांसफार्मर आए बिना ही अफसरों ने बैंक गारंटी लौटा दी। इससे कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया में दिक्कत आ रही है। ट्रांसफार्मर खरीद घोटाले में पिटकुल के अफसरों, इंजीनियरों ने कई स्तर पर घपलेबाजी की है। इस मामले में तब भी बहुत सवाल उठे थे, लेकिन न तो पिटकुल और न ही ऊर्जा मंत्रालय ने इसकी जांच बिठाई। नई सरकार में हो रही जांच से इन अनियमितताओं से अब धीरे धीरे पर्दा उठने लगा है।
झाझरा सब स्टेशन में लगे 80 एमवीए के ट्रांसफार्मर के दो बार खराब हो जाने से पूरी खरीद प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में है। तत्कालीन एमडी एसएस यादव के कार्यकाल में खरीदे गए 24 करोड़ रुपये के ट्रांसफार्मर खरीद की जांच चल भी रही है। जांच में यह बात सामने आई है कि ट्रांसफार्मर को हैंड ओवर लेने से पहले पिटकुल के इंजीनियरों, अफसरों ने विभागीय कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया। इसी तरह, बैंक गारंटी लौटाने में भी अफसरों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। दरअसल, पहली बार मई 2016 में जब ट्रांसफार्मर खराब हुआ तो इसे मेंटेनेंस के लिए कंपनी को भेजा गया।
तब इसके एवज में पिटकुल ने कंपनी से ट्रांसफार्मर के मूल्य के बराबर लगभग पांच करोड़ रुपये की बैंक गारंटी पिटकुल ने ली। इस बीच, सितंबर में पिटकुल अफसरों ने गुपचुप तरीके से कंपनी को बैंक गारंटी वापस लौटा दी। जबकि ट्रांसफार्मर पिटकुल के हैंड ओवर हुआ ही नहीं था। ट्रांसफार्मर दोबारा खराब होने पर मेंटेनेंस के लिए जा चुका है, लेकिन पिटकुल के पास गारंटी के रूप में कुछ नहीं है। ऐसे में अगर पूरे प्रकरण की जांच निष्पक्ष तरीके से हो तो कई और अफसरों का इसमें नपना तय है। उधर, कंपनी प्रबंधन का कहना है कि पिटकुल से नियमानुसार ही बैंक गारंटी प्राप्त की गई है।