अगर अभी भी तंबाकू के सेवन की रोकथाम के उपाय न हुए तो 2020 तक उत्तराखंड में हर रोज तंबाकू से 30 मौत होने लगेंगी।
इस वक्त राज्य में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या 31 लाख है। उत्तराखंड यूथ टोबेको सर्वे रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
वर्ल्ड लंग फाउंडेशन (डब्लूएलएफ)-साउथ एशिया और उत्तराखंड टोबेको फ्री इनीशिएटिव की तरफ से हुए इस सर्वे की रिपोर्ट को शुक्रवार को जीएमएस रोड स्थित एक होटल में जारी किया गया। प्रदेश में पहली बार राजकीय इंटर कालेजों में तंबाकू सेवन को लेकर इस तरह का सर्वे किया गया है।
10 साल से भी कम उम्र में लगी लत
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) और सीडीसी एटलांटा के सहयोग से कक्षा 8 से 12 तक में अध्ययनरत 13 से लेकर 17 आयु वर्ग के किशोरों के बीच यह सर्वे हुआ, जिसमें 12.2 फीसदी छात्रों के तंबाकू का सेवन करने की बात सामने आई।
सर्वे में 3000 से अधिक छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया। डब्लूएलएफ-साउथ एशिया के अध्यक्ष जीआर खत्री ने रिपोर्ट का प्रोजेक्टर पर प्रेजेंटेशन भी दिया।
इससे पूर्व सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस अवसर पर डब्लूएलएफ-साउथ एशिया के महासचिव केएन तिवारी, डब्लूएलएफ-न्यूयार्क के एंड्रयू एस रेनडीरियो, अपर सचिव एसराजू, निदेशक शिक्षा सीएस ग्वाल, राम कपालकर, प्रबोध आदि उपस्थित रहे।
उत्तराखंड यूथ टोबेको सर्वे रिपोर्ट की मानें तो धूम्रपान करने वाले 86.3 फीसदी छात्रों ने 15 वर्ष की आयु तक धूम्रपान शुरू कर दिया था, जबकि 30.6 प्रतिशत ऐसे पाए गए, जो 10 वर्ष की आयु से पहले ही धूम्रपान करना शुरू कर चुके थे।
स्कूल के बराबर में ही मुहैया तंबाकू
तंबाकू का सेवन करने वाले 80 प्रतिशत से भी अधिक छात्र किसी जनरल स्टोर से तंबाकू उत्पाद खरीदने वाले मिले, जबकि 20.8 प्रतिशत छात्र ऐसे थे, जो राजकीय विद्यालयों के भीतर अथवा 100 गज की परिधि में स्थित दुकानों से यह उत्पाद खरीद रहे थे।
छात्र हर रोज 10 रुपये से अधिक उड़ाते हैं धुएं में
इन सरकारी स्कूलों का हाल यह है कि यहां तंबाकू, धूम्रपान का सेवन करने वाले 55 फीसदी छात्र हर रोज 10 रुपये से ज्यादा सिगरेट के धुएं में उड़ाते हैं। इस तरह यह खर्च एक माह में 300 रुपये से भी अधिक बैठता है, यानी उसकी फीस से भी अधिक।
जी नहीं, माता-पिता से नहीं सीखते
सर्वे रिपोर्ट में यह सामने आया कि 55 प्रतिशत से अधिक छात्रों के माता-पिता तंबाकू का सेवन करते हैं, लेकिन उनमें से केवल 1.7 प्रतिशत छात्रों ने यह आदत अपने माता-पिता से ली। कई पैसिव स्मोकिंग (किसी अन्य के धूम्रपान करने से निकला धुआं) के शिकार थे।
यह तो सरकार की नाकामी
उत्तराखंड यूथ टोबेको सर्वे रिपोर्ट रिलीज कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डीजीपी बीएस सिद्धू थे। तंबाकू से होने वाली आर्थिक क्षति का जिक्र करते हुए सिद्धू बोले-यह सरकार की नाकामी है। निकोटिन को भी एनडीपीएस एक्ट में शामिल किए जाने की पैरवी करते हुए उन्होंने राजस्व के लिए इसे बढ़ावा देने पर सवाल उठाया। बोले-ड्रग्स तो इससे भी ज्यादा राजस्व दे सकती है। क्या महज राजस्व के लिए सेहत से खिलवाड़ किया जा सकता है? उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया, उन्हें ऐसे स्कूलों के बारे में बताएं जहां अभी भी 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं।