आक्रोशित पुरोहितों ने मंदिरों पर जबरन थोपे जा रहे बोर्ड को तत्काल निरस्त करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि अनादि काल से ही पुरोहित समाज द्वारा गंगोत्री आदि धामों की देखरेख का जिम्मा संभाला जा रहा है, लेकिन आज निजी फायदे के लिए सरकार ने धामों की सारी जिम्मेदारी व आर्थिक निर्णयों की ताकत देवस्थानम बोर्ड के हाथों में सौंप दी है।
आंदोलन के वक्त स्थानीय विधायक ने पुरोहितों को सहयोग का भरोसा दिया था, लेकिन आज वह स्वयं बोर्ड के सदस्य बन गए हैं। जिससे स्पष्ट है कि सरकार पुरोहितों की मांग के प्रति गंभीर नहीं है। प्रदर्शनकारियों में गंगोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष अरुण सेमवाल, संजीव सेमवाल, राकेश सेमवाल, प्रेमवल्लभ सेमवाल, गोवर्द्धन सेमवाल, विष्णु सेमवाल, कामेश्वर सेमवाल, संतोष सेमवाल सहित कई तीर्थ पुरोहित शामिल रहे।