प्रदेश में बिना मान्यता चल रहे मदरसों के खिलाफ राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और प्रशासन की ओर से अभियान तेज कर दिया गया है। शनिवार को देहरादून में एक और हल्द्वानी में दो मदरसे सील किए गए, जबकि तीन बंद कराए गए। पिछले कुछ दिनों में राज्य में अब तक 17 मदरसे सील किए जा चुके हैं। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ.सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक अभियान आगे भी जारी रहेगा।
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष के मुताबिक राज्य सरकार ने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया है। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी संबंधित संस्थान निर्धारित मानकों को पूरा कर शिक्षा विभाग से आवश्यक मान्यता प्राप्त नहीं कर लेते।
प्राधिकरण के अध्यक्ष के मुताबिक देहरादून जिले में तीन मदरसों के संबंध में कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया, आजाद कॉलोनी, सी-15, मस्जिद के पास को सील कर दिया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि इस मदरसे के पास निर्धारित मानकों के अनुरूप आवश्यक मान्यता नहीं थी।
वहीं, मदरसा दार-ए-अरकम, आजाद कॉलोनी, माजरा, देहरादून के प्रबंधकों ने स्वयं लिखित रूप से अवगत कराया है कि वे इसे संचालित नहीं कर रहे हैं, उन्होंने मदरसा बंद कर दिया है। मदरसा दारुल उलूम रहीमिया, मक्का मस्जिद, देहरादून के प्रबंधक ने भी ऐसी ही जानकारी दी।
ऊधमसिंह नगर में भी एक मदरसा ऐसे ही बंद कर दिया गया है। जबकि हल्द्वानी में मदरसा जामिया नूनिया बरकते ए आमिना और रमजान ऑर्गेनाइजेशन इमाइजेशन सुन्नी बड़ी मस्जिद इंदिरा नगर बनभूलपुरा को सील किया गया है। उन्होंने कहा, सरकार की स्पष्ट नीति है कि प्रदेश में कोई भी शिक्षण संस्था निर्धारित नियमों एवं मानकों की अनदेखी करते हुए संचालित न हो। बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और उनके भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।