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UP के खुरापाती बंदरों से निपटने को तैयार हुई 'उत्तराखंडी सेना'

Wed, 11 Nov 2015 08:17 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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यूपी के जिलों में बंदरों को पकड़कर उत्तराखंड की सरहद में लाकर छोड़ा जा रहा है। इससे निजात पाने के लिए उत्तराखंड के तीन विभाग साथ मिलकर काम करेंगे।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत के नाराजगी जाहिर करने के बाद इस समस्या से निपटने के लिए तीन विभागों की संयुक्त टीम गठित की जाएगी। यह टीम सरहदी इलाकों में गश्त करके लोगों को बंदरों को राज्य की सीमा के अंदर छोड़ने से रोकेगी। इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) दिग्विजय सिंह खाती ने आदेश जारी किए हैं।

उत्तराखंड के लोग पहले से ही बंदरों के आतंक से परेशान हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद वन विभाग ने गली-मोहल्लों में बंदरों को पकड़ने और उनकी नसबंदी करने की कार्ययोजना तैयार की है।
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बंदरों की नसबंदी के लिए गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में सेंटर बनाने के लिए कैंपा मद से पांच करोड़ रुपये आवंटित कर दिए गए। प्रदेश में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए उपाय शुरू हुए हैं। यूपी के जिलों से लाकर उत्तराखंड में छोड़े जा रहे बंदरों की वजह से दिक्कत और बढ़ गई है।
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यूपी-उत्तराखंड की सरहदों पर बढ़ाई जाएगी गश्त

बाहर से आने वाले यात्रियों और सैलानियों को प्रदेश में दाखिल होते ही बंदरों की समस्या से दो-चार होना पड़ता है। इस पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अधिकारियों को आदेश किए हैं कि प्रदेश की सरहद के अंदर किसी को बंदर न छोड़ने दिया जाए।

सरहद पर गश्त और बढ़ा दी जाए। प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) दिग्विजय सिंह खाती ने बताया कि इस पर वन विभाग, परिवहन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम गठित की जा रही है। उन्होंने बताया कि यूपी के सरहदी जिलों में लोग बंदर पकड़ते हैं और उन्हें यहां लाकर छोड़ जाते हैं, जिससे प्रदेश के यूपी से सटे इलाकों में बंदरों का आतंक बढ़ रहा है।

बंदरों की वजह से लोग बहुत परेशान हैं। कहीं भी जाने पर लोग इसकी शिकायत करने लगते हैं। बंदर काट लेते हैं। इसके साथ ही नुकसान करते हैं।
- दिनेश अग्रवाल, वन मंत्री

पहली प्राथमिकता बंदरों की समस्या से निजात की है। इसके लिए कार्ययोजना तैयार हो गई है। बाड़े बनाए जा रहे हैं।
- बीना शेखरी, प्रमुख वन संरक्षक, उत्तराखंड
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