नामी टेलीकॉम कंपनी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का जाल उत्तराखंड, यूपी, बिहार, बंगाल, झारखंड और अन्य प्रदेशों तक फैला हुआ था। कंपनी के प्लानों की पहले से ही जानकारी होने के कारण उनका नेटवर्क इतना भरोसेमंद दिखाई देता था कि अच्छे-अच्छे व्यापारी तक गच्चा खा गए। अकेले उत्तराखंड में ही ठगों ने साढ़े छह करोड़ का चूना लगाया है।
काशीपुर निवासी मनोज जैन और शक्ति अग्रवाल को टेलीकॉम की व्यवसायिक डील के सिलसिले में 20 जुलाई को रुद्रपुर बुलाया गया था। वहां उनकी मुलाकात अश्वनी, विनोद राय व अन्य से हुई। अश्वनी को कंपनी के ईस्ट एंड सेंटर जोन का प्रोजेक्ट हेड बताया गया। बातचीत के दौरान कंपनी का ब्रॉडकास्टिंग वायरलेस स्मार्ट बॉक्स, ऑनलाइन मनी और ऑनलाइन शॉपिंग प्लान के बारे में जानकारी दी गई।
कहा कि कंपनी काशीपुर में स्टूडियो भी बनाकर देगी, जिसमें छह चैनल होंगे। 1.5 लाख बॉक्स जिनकी कीमत 4.50 करोड़ बताई गई। इसके लिए 25 प्रतिशत एडवांस कंपनी में जमा कराने को कहा गया। इस दौरान उनकी अश्वनी से बात होती रही। एग्रीमेंट से पहले वायरलेस मीडिया ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के खाते में 5.51 लाख रुपये जमा करने को कहा गया। इस पर उनकी ओर से 23 जुलाई को रकम जमा कराई गई। शक्ति अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने राशि आरआईएल ब्रॉडकास्टिंग कंपनी में जमा कराई जबकि एग्रीमेंट दूसरी कंपनी के नाम किया गया।
29 जुलाई को अश्वनी ने निखिल गांधी और विवेक शर्मा को काशीपुर भेजा, जो कंपनी के लोगो लगे हुए पेपर और मुहरें लेकर और एग्रीमेंट लिखकर ले गए। इसके बाद उनसे अलग-अलग तारीखों में कुल 67.26 लाख रुपये नकद और खातों में जमा करा लिए। छानबीन में पता लगा कि उक्त ठगों की ओर से हरिद्वार में भी बड़ा कार्यालय खोला गया है। उक्त कंपनी की ओर से प्रस्तावित प्लानों के बारे में उन्हें एडवांस जानकारी रहती है। इसी का फायदा उठाकर वह ठगी को अंजाम देते हैं।