शिवलिंग को स्थानीय पुष्पों, फल पुष्पों, अक्षत से ढक दिया गया। इसके बाद मठापति रामप्रसाद मैठाणी, प्रबंधक बलबीर नेगी डोली प्रभारी प्रकाश पुरोहित की उपस्थिति में पुजारी अतुल मैठाणी और अजय मैठाणी ने तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद किए।
परिक्रमा के बाद हक-हकूकधारी भगवान तुंगनाथ जी की चल विग्रह डोली के साथ चोपता के लिए निकले। पांच नवंबर और 6 नवंबर को चलविग्रह डोली दूसरे पड़ाव भनकुन प्रवास करेगी। सात नवंबर को भगवान तुंगनाथ जी की चलविग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में विराजमान हो जाएगी। इसके बाद अगले छह महीने भगवान तुंगनाथ की पूजा यहीं होगी।