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यहां तीन के बजाय डेढ़ साल में थमा दी गई पीएचडी की डिग्रियां, बिना प्रवेश परीक्षा मिल गया प्रवेश

Wed, 17 Apr 2019 01:13 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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प्रदेश के उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में पीएचडी की डिग्री रेवड़ी की तरह बंटती है। यहां न तो प्रवेश परीक्षा देने की जरूरत और न ही तीन साल तक शोध करने की आवश्यकता। बस सेटिंग हो तो डेढ़ साल में पीएचडी की डिग्री और बिना प्रवेश परीक्षा ही पीएचडी में प्रवेश मिल जाता है।

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यह खुलासा हुआ है सरकार के आदेश पर गठित जांच समिति की प्राथमिक रिपोर्ट में। इस रिपोर्ट में पूरे मामले की विजिलेंस जांच की सिफारिश के साथ ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है। तकनीकी विवि की पीएचडी की जांच के लिए सरकार ने 19 मार्च 2018 को जांच के आदेश जारी किए थे। समिति ने जांच शुरू की तो पीएचडी फर्जीवाड़ा परत-दर-परत खुलता चला गया।

मामले में शासन से कार्रवाई के निर्देश मिले थे। मामले में कार्रवाई की जा रही है। -प्रो. अनीता रावत, कुलसचिव, तकनीकी विवि

यह फर्जीवाड़े आए सामने

-वर्ष 2009 में चार रिसर्च स्कॉलर पंजीकृत थे और इन्हें 2010 में अलग-अलग तिथियों पर डिग्री अवार्ड हुई। जबकि इनका पंजीकरण विभिन्न विश्वविद्यालयों से यहां ट्रांसफर किया गया था। यह किस नियम के तहत यहां आए और कैसे डिग्री मिली, इसका कहीं उल्लेख नहीं है।
-वर्ष 2009 में 10 अलग रिसर्च स्कॉलर पंजीकृत हुए। एक रिसर्च स्कॉलर 2010 में पंजीकृत हुआ। वाइवा 2011 में हुआ। चौंकाने वाली बात यह है कि इन सभी का वाइवा पंजीकरण के महज एक वर्ष सात माह में करा दिया गया। जबकि नियम के हिसाब से कम से कम तीन वर्ष का समय होना चाहिए था।
-वर्ष 2013 से 21 अप्रैल 2018 तक विवि ने 284 छात्रों को पीएचडी की डिग्री दी गई, लेकिन बहुत से छात्रों की विवि में कोई जानकारी ही नहीं है। यहां तक कि बिना नियमों का पालन किए ही गाइड बदल दिए गए।
-वर्ष 2017 की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई। जिन छात्रों ने परीक्षा नहीं दी, उन्हें पास कर दिया गया। जो छात्र न्यूनतम योग्यता पूरी नहीं करते थे, उन्हें भी पीएचडी में पंजीकृत कर दिया गया।
-कंप्यूटर साइंस के छात्र की थिसिस को सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर से चेक कराया गया, जिसके बाद पीएचडी अवार्ड कर दी गई।
-2017 की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में न तो नियमों का पालन किया गया और न ही परीक्षा का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है। लिहाजा, इस परीक्षा को शून्य घोषित करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है।
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कार्रवाई न होने से कुलसचिव सवालों के घेरे में

चार महीने पहले जिस प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने विवि को कार्रवाई के निर्देश दिए थे, उस पर आज तक विवि प्रशासन ने कोई एक्शन नहीं लिया है। जबकि पूर्व कार्यवाहक कुलपति ने जनवरी में ही कार्रवाई की संस्तुति कर दी थी लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई है। लिहाजा, विवि की कुलसचिव की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

मैंने अपने कार्यकाल में पीएचडी में यूजीसी रेगुलेशन का अनुपालन सुनिश्चित किया था। प्रवेश परीक्षा भी पूर्ण पारदर्शिता के साथ कराई गई थी। किसी भी जांच का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।
-प्रो. पीके गर्ग, पूर्व कुलपति, तकनीकी विवि
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