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Uttarakhand News: सिस्टम की खामी, 24 साल अतिदुर्गम की सेवा के बाद भी सुगम के लिए तरस गए शिक्षक चंद्रमोहन

Thu, 06 Aug 2026 06:39 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला न्यूज डेस्क, देहरादून

सार

उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादलों को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए तबादला एक्ट-2017 के बावजूद कई पात्र शिक्षक वर्षों से दुर्गम और अतिदुर्गम क्षेत्रों में ही कार्यरत हैं। चकराता के शिक्षक चंद्रमोहन खुगशाल और सोहन लाल जैसे मामलों ने एक बार फिर तबादला व्यवस्था की खामियों और अनिवार्य तबादलों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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तबादला आदेश - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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प्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादलों में पारदर्शीता और सिफारिशी तबादलों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने तबादला एक्ट 2017 बनाया। सिस्टम की खामी के चलते हजारों शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। ताजा मामला जीआईसी बुल्हाड़ चकराता के सहायक अध्यापक चंद्र मोहन खुगशाल का है। जिनकी पहली नियुक्ति वर्ष 2002 में अतिदुर्गम क्षेत्र के स्कूल में हुई और अब अगले साल 2027 में सेवानिवृत्ति है, लेकिन 24 साल की अति दुर्गम की सेवा के बाद भी वे सुगम में नहीं आ पाए।

शिक्षा विभाग में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरोथा चकराता में सहायक अध्यापक सोहन लाल भी 22 साल की दुर्गम की सेवा के बावजूद सुगम में आने के लिए तरस गए हैं। सोहन लाल बताते हैं कि उनकी पहली नियुक्ति 2003 में जीआईसी मोतियापाथर अल्मोड़ा में हुई। इस स्कूल में 11 साल की सेवा के बाद मंडल परिवर्तन कर गढ़वाल मंडल के बरोथा स्कूल में आ गए।

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20 से 25 साल की सेवा के बाद भी शिक्षक सुगम में नहीं आ पा रहे
यहां भी 11 साल की अतिदुर्गम की सेवा हो चुकी है। जबकि तबादला एक्ट में कहा गया है कि जो कर्मचारी, शिक्षक लगातार चार साल से सुगम में तैनात हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से दुर्गम में तैनात किया जाएगा। बशर्ते वे किसी प्रकार की छूट के दायरे में न आते हों। वहीं, जो दुर्गम में हैं, तीन साल की सेवा के बाद उन्हें सुगम क्षेत्र के स्कूलों में लाया जाएगा। लेकिन 20 से 25 साल की सेवा के बाद भी शिक्षक सुगम में नहीं आ पा रहे हैं। शिक्षकों के मुताबिक यह दूसरा साल है, जब शिक्षकों के अनिवार्य तबादले नहीं हो पा रहे हैं। तबादला एक्ट बनने के बाद भी कभी शत प्रतिशत पात्र शिक्षकों के तबादले नहीं हुए।

जब सभी विभागों में हर साल कर्मचारियों के अनिवार्य तबादले किए जा रहे हैं, तो केवल शिक्षकों के साथ अन्याय क्यों किया जा रहा है। तय समय पर तबादले न होने से कई शिक्षक 25 से 30 साल से दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्र में हैं। जो सुगम में नहीं आ पा रहे हैं, इसका कही न कही उनके मनोबल पर असर पड़ रहा है। रमेश पैन्यूली, पूर्व प्रांतीय महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ

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अनुरोध के आधार पर तबादलों से आस लगाए हैं शिक्षक

प्रदेश में इस साल शिक्षकों के तबादला एक्ट के तहत अनिवार्य तबादले नहीं होंगे, लेकिन अनुरोध के आधार पर विभाग की ओर से तबादलों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। ऐसे में पात्र शिक्षक तबादलों की आस लगाए हैं।

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