गंगा की सफाई के मामले में उत्तराखंड शासन ने अपना एक्शन प्लान नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल में जमा कर दिया है।
सोमवार को महाधिवक्ता ने प्रदेश का एक्शन प्लान जमा किया। इस पर 27 जनवरी को सुनवाई होनी है। गंगा में डाली जा रही गंदगी के मामले में लोगों ने एनजीटी में जनहित याचिकाएं दाखिल की हैं। ट्रिब्युनल उन पक्षों को भी सुनेगा। एक्शन प्लान में एसटीपी, आश्रमों, धर्मशालाओं की बंदी के मामले में शासन ने ट्रिब्युनल से समय मांगा है।
मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि एनजीटी ने 18 जनवरी को एक्शन प्लान देने के लिए कहा था। सोमवार को एक्शन प्लान जमा कर दिया गया। इस पर 27 को सुनवाई होनी है। दूसरे पक्षों को सुनने के बाद ट्रिब्युनल निर्देश जारी करेगा।
जिन लोगों ने ट्रिब्युनल में जनहित याचिकाएं दाखिल की थीं, उनका पक्ष भी सुना जाएगा। एक्शन प्लान में एनजीटी ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण, हरिद्वार में आश्रमों, धर्मशालाओं की बंदी के मामले में एनजीटी से समय मांगा है।
इसके अलावा एक्शन प्लान में गंगा की धारा से सौ मीटर की दूरी तक कोई निर्माण न होने के मामले में डाटा बाद में दाखिल करने के लिए कहा है। इसके लिए भी मोहलत मांगी गई है। ट्रिब्युनल ने 10 दिसंबर को इस संबंध में आदेश जारी किए थे। इसके अलावा जनहित याचिकाओं के आधार पर अलग-अलग भी निर्देश जारी किए हैं।