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Uttarakhand@23: सबसे ज्यादा रोजगार के मुद्दे से प्रभावित रही उत्तराखंड की सियासत, पढ़ें ये खास सर्वे रिपोर्ट

Wed, 09 Nov 2022 06:23 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

Uttarakhand State Foundation Day 2022: सभी 13 जिलों में 1478 लोगों से अमर उजाला ने राज्य के सरोकारो से जुड़े सात प्रमुख प्रश्नों पर जबाव लिए। इस सर्वे के नतीजे क्या आए वो आप इस खास रिपोर्ट में पढ़िए...
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आंदोलन - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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उत्तराखंड की सियासत को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला रोजगार का मुद्दा राज्य के लोगों के लिए बहुत मायने रखता है। अधिकांश लोग चाहते हैं कि स्थानीय युवाओं को राज्य में स्थापित उद्योगों में रोजगार के लिए सरकार कानून बनाए। यह राय अमर उजाला के सैंपल सर्वे में उभरकर सामने आई है। सभी 13 जिलों में 1478 लोगों से अमर उजाला ने राज्य के सरोकारो से जुड़े सात प्रमुख प्रश्नों पर जबाव लिए। इस सर्वे के नतीजे बताते हैं। 

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1. टिहरी : सपनों का उत्तराखंड बना
समग्र रूप में उत्तराखंड के लोगों का मानना है कि उनके सपने का उत्तराखंड नहीं बना, लेकिन सर्वे में शामिल टिहरी जिले के 83 प्रतिशत से अधिक लोगों का मत है कि 22 साल की यात्रा में सपनों का उत्तराखंड बना, जबकि 13 फीसदी लोग इससे इत्तेफाक नहीं रखते।
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2. चारों धाम के लोगों ने माना चारधाम प्रबंधन के लिए बने बोर्ड
देवस्थानाम बोर्ड के गठन का बेशक बहुत विरोध रहा, लेकिन बदरी-केदार के लोगों का ही मत चारधाम प्रबंधन के लिए बोर्ड के पक्ष में है। सर्वे में चमोली जिले के 76 फीसदी और रुद्रप्रयाग जिले के 79 फीसदी लोगों ने कहा कि वैष्णोदेवी की तर्ज पर चारधाम प्रबंधन बोर्ड बनना चाहिए। उत्तरकाशी के 94 प्रतिशत लोगों की भी यही राय है।

3. देहरादून के लोग ही राजधानी से संतुष्ट नहीं
ट्रैफिक जाम, बढ़ता प्रदूषण और बढ़ती आबादी से परेशान देहरादून के लोग शहर को राजधानी बनाने से संतुष्ट नहीं हैं। ‘अमर उजाला’ सर्वे में 49 फीसदी से अधिक लोगों का मानना है कि वह राजधानी से संतुष्ट नहीं है। हालांकि 43 फीसदी से अधिक लोगों को राजधानी सुहाई है।

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4. पिथौरागढ़-चंपावत-नैनीताल के लोग तीसरे राजनीतिक विकल्प के पक्षधर
सीमांत जिला पिथौरागढ़ और चंपावत के लोग प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरे राजनीतिक विकल्प के पक्षधर हैं। ‘अमर उजाला’ के सर्वे के मुताबिक, पिथौरागढ़ के 70 प्रतिशत लोग, चंपावत के 67 प्रतिशत लोग और नैनीताल के 51 फीसदी से अधिक लोग चाहते हैं कि प्रदेश में तीसरा राजनीतिक विकल्प भी होना चाहिए।

5. पौड़ी के लोग स्वास्थ्य और शिक्षा से संतुष्ट नहीं 
प्रदेश के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के गृह जिले पौड़ी के लोग स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं से संतुष्ट नहीं हैं। ‘अमर उजाला’ के सर्वे में 86 फीसदी लोगों ने यह बात स्वीकार की है कि जिले में एक केंद्रीय विवि, एक सरकारी मेडिकल कॉलेज और एनआईटी होने के बावजूद स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं उनकी अपेक्षाएं के अनुरूप नहीं हैं। वहीं रुद्रप्रयाग जिले के 90 फीसदी से अधिक लोगों का मानना है कि पहाड़ में शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है।

6. यूएस नगर, हरिद्वार और चंपावत के लोग नहीं मानते ज्यादा भ्रष्टाचार है
‘अमर उजाला’ के सर्वे में बेशक प्रदेशव्यापी राय राज्य में अधिक भ्रष्टाचार को लेकर हो, लेकिन यूएसनगर, हरिद्वार और चंपावत जिले इससे ज्यादा इत्तेफाक नहीं रखते। यूएसनगर के 55 फीसदी से अधिक लोगों ने कहा कि राज्य में दूसरे राज्यों से कम भ्रष्टाचार है। हरिद्वार जिले के 57 फीसदी और चंपावत के 60 फीसदी से अधिक लोगों की भी यही राय है।

7. अल्मोड़ा-बागेश्वर के सबसे अधिक लोगों ने कहा उद्योगों में रोजगार के लिए कानून बनाया जाए 
अल्मोड़ा जिले के लोगों का मानना है कि प्रदेश के उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकार हरियाणा की तर्ज पर कानून बनाए। ‘अमर उजाला’ सर्वे में अल्मोड़ा जिले के 95 प्रतिशत लोगों ने कानून बनाने की आवश्यकता जताई। बागेश्वर जिले के 90 फीसदी लोगों की भी यही राय है।
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