नई खेल नीति पर खेल मंत्री अरविंद पांडे की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित बैठक में मंथन हुआ। इस दौरान खेल मंत्री ने कहा कि विभाग के पास बजट की कमी बनी हुई है, ऐसे में आबकारी पर सेस लगाकर इस धनराशि को खेल विभाग को दिया जाना चाहिए।
बैठक में सुझाव रखा गया कि खेलों की तीन कैटेगरी बनाई जाएं। पहली कैटेगरी में एथलेटिक्स, ताइक्वांडो, जूडो, बैडमिंटन, शूटिंग, दूसरी में वॉलीबाल, फुटबाल, हॉकी, कराटे और तीसरी में अन्य खेलों को शामिल किया जाए। इसके अलावा हर ग्राम पंचायत में दो खेल मनरेगा और स्कूल से जोड़े जाएं।
महाविद्यालयों को खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। खिलाड़ियों को योगा व जिमनास्टिक आदि का विशेष प्रशिक्षण देकर प्रोत्साहित किया जाए। प्रशिक्षकों को देवभूमि खेल रत्न पुरस्कार दिया जाए। खिलाड़ियों को परिवहन में छूट दी जाए। इसके अलावा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी योजना शुरू की जाए।
वहीं, मुख्यमंत्री खेल विकास निधि का निर्माण किया जाए। खेल-खेल में योजना संचालित की जाए। स्पोर्ट्स ग्रिड बनाया जाए। खिलाड़ियों को रोजगार से जोड़ने के लिए चार फीसदी आरक्षण दिया जाए। छोटी उम्र के उदीयमान खिलाड़ियों को योग्यता के आधार पर चयन कर उन्हें वजीफा दिया जाए।
बैठक में ये रहे मौजूद
पूर्व सांसद बलराज पासी, उत्तरांचल ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष मुखर्जी निर्वाण, महासचिव डॉ.डीके सिंह, संयुक्त सचिव गुरुचरण सिंह, कोषाध्यक्ष महेश जोशी, उत्तराखंड टीईटी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष चेतन गुरुंग, उत्तराखंड तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह तोमर, उत्तरांचल राज्य निशानेबाजी संघ के महासचिव सुभाष राणा, उत्तरांचल बैडमिंटन संघ के संयुक्त सचिव राकेश डोभाल, उत्तराखंड जूडो संघ के महासचिव सतीश शर्मा, डॉ.आरबीएस रावत, उत्तराखंड हॉकी संघ के कोषाध्यक्ष नरेंद्र सिंह, संयुक्त सचिव योगेश जोशी, उत्तराखंड जिमनास्टिक संघ के महासचिव प्रमोद चौधरी, उत्तराखंड साइकिल संघ के अध्यक्ष विमल चौधरी, खेल सचिव बृजेश कुमार संत, संयुक्त निदेशक खेल धर्मेंद्र प्रकाश भट्ट, उप निदेशक एसके सार्की, अजय कुमार अग्रवाल, शक्ति सिंह ,नीरज गुप्ता, कृष्ण कुमार, सुरेश चंद्र पांडे।