इन छुट्टियों में सूरज से गांव वालों ने पूछा भी था कि शादी कर रहे हो क्या। तब सूरज ने कहा था अभी मेरी बहन की शादी होनी है उसके बाद अपनी शादी के बारे में सोचूंगा।
गांव वालों को अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि सूरज उनके बीच नहीं रहा। आज के जवान सूरज के शहीद होने के बाद से पूरा गांव स्तब्ध है।
वर्ष 2014 में कुविवि एसएसजे परिसर में बीए की पढ़ाई के दौरान सूरज ने लोअर मालरोड में किराए पर कमरा लिया था।
सूरज के पिता 51 वर्षीय नारायण सिंह ने बताया कि सूरज ने तब अपने कमरे की दीवार पर माई लाइफ इज आर्मी भी लिखा था।
आर्मी में जाने का शौक उसे बचपन से था। पढ़ाई के दौरान सूरज अल्मोड़ा में रोज सुबह शाम दौड़ भी लगाता था।
सूरज के दादा स्व. हरसिंह भाकुनी आनरेरी कैप्टन रह चुके हैं। उन्होंने सन 1971 में भारत-पाक युद्ध भी लड़ा था।
सूरज के पिता ने बताया कि दादा से ही उन्हें देश सेवा की प्रेरणा मिली। पालड़ी गांव में 70 से 80 परिवार रहते हैं। जिनमें भाकुनी परिवार के साथ से आठ लड़के सेना में हैं और देश सेवा कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2000 के आसपास पालड़ी गांव के रमेश सिंह सिंगवाल भी देश सेवा में डयूटी के दौरान शहीद हो गए थे।