14 मई 1962 को जन्मे वरिष्ठ आईएएस अफसर ओम प्रकाश मूल रूप से बौंसी, जिला बाँदा (बिहार) के रहने वाले हैं।
प्रोफेशन प्रोफाइल
-1987 बैच के आईएएस अफसर।
-1985 तक इनकम टैक्स में जॉब।
-ट्रेनिंग जौनपुर यूपी।
-एसडीएम-खुर्जा बुलंदशहर।
- सीडीओ-फतेहपुर भी रहे।
-डीएम-मऊ, गाजीपुर, बांदा, हाथरस और देहरादून रहे।
-सेक्रेटरी- फाइनेंस और इंडस्ट्री को छोड़ सभी डिपार्टमेंट में रहे।
-2012 में प्रमुख सचिव बने।
-2017 में अपर मुख्य सचिव बने।
एजुकेशन प्रोफाइल
-बीएससी फिजिक्स-ऑनर्स। पटना साइंस कॉलेज से।
-एमएससी-थेऔरोटिकल फिजिक्स। सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी।
-एम फिल-सीएसआईआर फ़ेलोशिप।
1. अजय विक्रम सिंह
2. मधुकर गुप्ता
3. डॉ. आरएस टोलिया
4. एम. रामचंद्रन
5. एसके दास
6. इंदु कुमार पांडे
7. नृप सिंह नपलच्याल
8. सुभाष कुमार
9. आलोक कुमार जैन
10. सुभाष कुमार
11. एन.रविशंकर
12. राकेश शर्मा
13. शत्रुघ्न सिंह
14. एस रामास्वामी
15. उत्पल कुमार सिंह
मुख्य सचिव की भूमिका में ओम प्रकाश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की प्राथमिकता वाली योजनाओं पर खास फोकस करेंगे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को साझा किया।
उन्होंने कहा कि चारधाम आलवेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना, केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य व वाह्य साहयतित योजनाओं के तहत अवस्थापनाओं के कार्यों को समय से पूरा कराया जाएगा। कोविड-19 महामारी और अनलॉक के दौर में राज्य के समक्ष चुनौतियों के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार के स्तर पर प्रयास चल रहे है।
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया है। इस दिशा में तेजी से प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री की स्वरोजगार योजना के तहत राज्य के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य का बेहतर से बेहतर वातावरण बनाने पर जोर रहेगा।
कृषि और उद्यानिकी को सर्वोच्च प्राथमिकता
नए मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि वह कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे। राज्य सरकार ने खेती को स्वरोजगार से जोड़ने की कई योजनाएं बनाई हैं, जिन्हें लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
चुनौतियां भी कम नहीं
अनलॉक की ओर बढ़ रहे उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी, लोकशाही और नौकरशाही के रिश्तों में आ रही कड़वाहट का मिटाना, मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना, आय के संसाधनों में बढ़ोतरी के रास्ते ढूंढना ताकि विकास कार्यों को जारी रहें।