दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में लिप्त तत्कालीन समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर एसआईटी का शिकंजा कसने लगा है। दो अधिकारियों के गिरफ्तारी के बाद अब पांच अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए शासन ने हरी झंडी दे दी है।
इस संबंध में शासन की ओर से नियुक्त स्पेशल काउंसल पुष्पा जोशी और ललित सामंत ने हाईकोर्ट में जानकारी दी है। हालांकि इसका लिखित आदेश अभी एसआईटी के पास नहीं पहुंचा है।
वर्ष 2011 से 2015 तक जिले के तीन हजार एससी, एसटी और ओबीसी विद्यार्थियों का बाहरी राज्यों के शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश दिखाकर 14 करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला किया गया था। घोटाले की जांच के लिए शासन की ओर से एसआईटी गठित की गई थी।
58 शैक्षिक संस्थानों और 60 बिचौलियों के खिलाफ केस दर्ज
एसआईटी अभी तक बाहरी राज्यों के 58 शैक्षिक संस्थानों और 60 बिचौलियों के खिलाफ जिले के विभिन्न थाना-चौकियों में केस दर्ज कर चुकी है। एसआईटी पूर्व समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर और पटल सहायक राजेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
एसआईटी सूत्रों के अनुसार जिस दौरान घोटाला हुआ था उस दौरान दो समाज कल्याण अधिकारी, दो सहायक समाज कल्याण अधिकारी और तीन पटल सहायक तैनात रहे। इनकी गिरफ्तारी के लिए शासन को पत्र भेजा गया था। शासन की ओर से अधिकारियों की गिरफ्तारी की अनुमति नहीं मिल पा रही थी। इस मामले में बीते 31 मार्च को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी।
कोर्ट ने जांच में देरी होने पर एसआईटी से सवाल पूछा था। एसआईटी ने शासन की ओर से अनुमति नहीं मिलने पर जांच में देरी होने का हवाला दिया था। शासन की ओर से नियुक्त स्पेशल काउंसल पुष्पा जोशी और ललित सामंत ने हाईकोर्ट में बताया कि शासन ने अनुमति दे दी है। एसआईटी सूत्रों के अनुसार लिखित पत्र मिलने के बाद केस दर्ज कर तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
जिले के 33 शैक्षिक संस्थानों में नहीं हुआ घोटाला
ऊधमसिंह नगर के 33 शैक्षिक संस्थानों से अभी तक अच्छी खबर है। छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने इन शैक्षिक संस्थानों में घोटाले की जांच पूरी कर दी है। अभी तक कोई घोटाला पकड़ में नहीं आया है।
एसआईटी सूत्रों के अनुसार जिले में कुल 202 शैक्षिक संस्थानों की जांच होनी है। समाज कल्याण विभाग ने अभी तक 55 शैक्षिक संस्थानों का रिकॉर्ड दिया है। इसमें भी कई तरह की अनियमितताएं हैं।