सल्ट उपचुनाव को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए लिटमस टेस्ट मान कर चल रही कांग्रेस ने अब पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने खुद भी सल्ट में डेरा जमा लिया है। इसके साथ ही अन्य कई पदाधिकारी भी सल्ट पहुंच गए हैं।
सल्ट में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के मैदान में न उतरने से कांग्रेस का काम बहुत हद तक आसान भी हुआ है। कांग्रेस को भाजपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के निधन के कारण भाजपा के पक्ष में सहानुभूति का सामना करना है।
भाजपा ने सुरेंद्र सिंह जीना के भाई महेश जीना को टिकट देकर इस काम को थोड़ा और मुश्किल भी बना दिया है। दूसरी ओर, कांग्रेस मान कर चल रही है कि कोरोना, महंगाई आदि मामलों को लेकर लोग भाजपा से नाराज हैं। सरकार के प्रति नाराजगी की भाजपा ने नेतृत्व परिवर्तन कर पुष्टि भी की है।
सरकार के प्रति इसी नाराजगी को देखते हुए कांग्रेस को सल्ट उपचुनाव में जीत की उम्मीद है। यह भी माना जा रहा है कि इस हिसाब से ही सल्ट का उपचुनाव वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट भी है। इसका मतलब यह भी हुआ कि सत्ता विरोधी लहर अगर है तो वह इस उपचुनाव में उभर कर सामने आएगी और विधानसभा चुनाव में भी उसका असर दिखाई देगा।
इसी को देखते हुए कांग्रेस ने अब उप चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव खुद भी मोर्चे पर झट गए हैं। उनका दो दिन का कार्यक्रम हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने अलग-अलग धड़ों की परवाह किए बिना वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल को मैदान में उतार दिया गया। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी के मुताबिक प्रभारी ने शनिवार को सल्ट में चुनाव संचालन समिति के पदाधिकारियों से भी बात की।
महिला वोटर यहां अधिक, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी मैदान में
सल्ट विधानसभा में महिला वोटरों की संख्या अधिक है। इसको देखते हुए कांग्रेस ने प्रचार के लिए कांग्रेस महिला प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्या को भी मैदान में उतारा है। सल्ट का कुछ इलाका नैनीताल से भी लगा हुआ है और सरिता आर्या नैनीताल में खासी सक्रिय भी रही हैं।