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छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी कैसे करेगी जांच, क्यों न सीबीआई जांच कराई जाए: नैनीताल हाईकोर्ट

Tue, 12 Feb 2019 11:12 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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nainital high court - फोटो : google
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समाज कल्याण विभाग से संबंधित 500 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में हाईकोर्ट ने कहा है कि मामला इतना बड़ा है तो एसआईटी इस मामले की जांच कैसे करेगी और क्यों न सीबीआई जांच कराई जाए। सोमवार को कोर्ट में सरकार की ओर से घोटाले के तार छह राज्यों से जुड़े होने का जवाब आने के बाद मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की। 

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देहरादून निवासी रविंद्र जुगरान की याचिका पर सुनवाई में सोमवार को मुख्य सचिव ने कोर्ट में शपथपत्र पेश किया। इसमें स्वीकार किया गया कि छात्रवृत्ति घोटाले के तार छह राज्यों से जुड़े हुए हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने पलटकर पूछा कि इतने बड़े मामले की जांच एसआईटी किस तरह से करेगी। इस पर सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि एसआईटी ने जांच करीब-करीब पूरी हो गई है। इस पर कोर्ट ने दोहराया कि क्यों न इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। खंडपीठ ने याची को प्रत्युत्तर के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 18 फरवरी को करना तय किया। पीठ ने यह भी कहा कि यह भी संभव है कि 18 को  इस पर कोर्ट अपना फैसला दे दे। 

पूर्व में भी हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्यों न इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। इस मामले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी गठित हुई थी और एसआईटी के अध्यक्ष डॉ. मंजूनाथ ने हाईकोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर कहा था कि सरकारी विभाग जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। पूर्व में भी मुख्य सचिव ने शपथपत्र दाखिल किया था लेकिन उस समय भी कोर्ट सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई थी।
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इसके बाद एसआईटी के अध्यक्ष और हरिद्वार के यातायात पुलिस अधीक्षक का तबादला कर दिया गया था। कोर्ट ने इस तबादले पर भी रोक लगाई थी और प्रदेश सरकार को एसआईटी का सहयोग करने का आदेश दिया था। याची रविंद्र जुगरान ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। जुगरान का कहना था कि अनुसूचित जाति/ जनजाति की छात्रवृत्ति में करोड़ों का घपला हुआ है। इनके नाम पर पैसा लिया गया लेकिन छात्रों को यह पैसा दिया ही नहीं गया।

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